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उमड़ घुमड़ तोपों सा गरजे ,बरसे यह जब रण में सावन — शैलजा सिंह

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23 जुलाई रात 9:00 बजे से देर रात तक राष्ट्रीय कवि संगम मंच पर कजरी महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में सूरत से श्री महेश चंद्र मिश्र, बिहार से श्री सुशील ठाकुर साहिल, एनसीआर गाजियाबाद से श्रीमती शैलजा सिंह, सुल्तानपुर से श्री पुष्कर सुल्तानपुरी उत्तर प्रदेश से श्री विकास चौरसिया, लखनऊ से डॉक्टर सुभाष चंद्र रसिया ,कच्छ गुजरात से डॉक्टर संगीता पाल , और हरियाणा से श्रीमती सुनीता सिंह ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री सुशील साहिल साहब ने कहा कजरी के इतने रूप एक मंच पर पहली बार सुने । ज्ञातव्य हो कि कजरी के पारंपरिक गायन से लेकर उप शास्त्रीय गायन तक को मंच पर प्रस्तुत

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किया गया साथ ही कजरी की पारंपरिक विषय वस्तु के अतिरिक्त जन समस्याओं से जोड़ते हुए जीएसटी ,महंगाई और टैक्स की बात करते हुए देश के सरहद तक की बात कर जनमानस को आंदोलित किया गया।कार्यक्रम भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एवं सावन में गाए जाने वाले गीतों की लोक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए आयोजित किया गया। कार्यक्रम का संचालन बड़ोदरा गुजरात की डॉ राखी कटियार ने किया।

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