गांव के मुख्य सड़क चौराहे पर बैठे आवारा पशु , हादसों को दे रहे न्यौता, प्रशासन बेखबर, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान
शाम के समय मवेशियों का रहता है जमावड़ा, राहगीर और वाहन चालक परेशान
रामाराम पावड़ ओगाला बौद्धिक भारत सेड़वा
बोरला जाटान (ओगाला) – गांव के मुख्य सड़क चौराहे पर या आम रास्तों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहने से वाहन चालकों सहित राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे कभी भी दुर्घटनाएं घट सकती हैं। गांव में मुख्य सड़क आकल फांटा चौराहा, बोरला नाडी रोड़ चौराहा, सोनाराम रेबारी का थान स्कूल रोड़ चौराहा, ग्राम ओगाला रोड सहित सभी मुख्य चौराहों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। यह मुख्य सड़क (धोरीमन्ना से साता और उपखंड सेड़वा से वाया आकल, बोरला जाटान, वाया सोमारड़ी, कोट तिलांन ,सांचौर ) के बोरला जाटान चौराहे पर रात के समय मवेशी सडक पर बीच में ही बैठे रहते हैं। इससे दुर्घटनाए घट सकती हैं। ग्राम वासियों का कहना है कि प्रशासन को सार्वजनिक रूप से मुनादी करवाकर मवेशी मालिकों को चेतावनी देनी चाहिए, लेकिन अभी तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। आवारा मवेशी सड़क पर गदंगी फैला देते हैं और रात के समय दुकानों के बाहर बैठे रहते हैं। ग्रामवासियों ने ग्राम प्रशासन से इन पर पाबंदी लगाने ने की मांग की है। सार्वजनिक रूप से घोषणा पत्र जारी कर मवेशी पशुपालकों को सूचित करे कि कोई भी सांड, बैल, गोमाता को निराश्रित नहीं छोड़े, सेवा नहीं हो रही है तो नजदीकी गोशाला में भेजे।
मुख्य सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा के कारण लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही है परंतु प्रशासन द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है और मवेशियों का जमावड़ा हटने का नाम नहीं ले रहा है। जानकारी है कि लोग अपने अपने घरों में पशु धन के रूप में मवेशियों का पालन करते आ रहे हैं। राजस्थान में मवेशियों को पशुधन और दूध के लिए जाता है और प्रतिवर्ष दिवाली के मौके पर पशुधन की पूजा अर्चना की जाती है गाय को गोमाता मानते है पहले हर मोहल्ला में चारागाह हुआ करता था आजकल गोचर चारागाह भूमि पर भूमाफियों ने अतिक्रमण कब्जा कर रखा है पहले चारागाह जहां मवेशी बरसात के दिनों में विचरण करते थे। अन्य दिनों में भी यहां मवेशियों का जमावड़ा रहता था। कालांतर में लोग अपने घरों में मवेशियों के पालने को झमेला समझने लगे और धीरे-धीरे गांव में मवेशियों की संख्या घटने लगी। किसान जहां पहले बैल एवं भैंसा से हल जोतते थे तथा कृषि कार्य में भी इनका उपयोग किया जाता था। परंतु अब इस ट्रैक्टर के युग में बड़े-बड़े किसान भी बैल या भैंसा रखना छोड़ ट्रैक्टर से खेती करने लगे हैं ।
सड़क पर विचरण करते पशु
बावजूद इसके अभी भी हर गांव में बड़ी संख्या में गाय बैल भैंस एवं भेड़ बकरी पाले जाते हैं, मवेशियों की संख्या घटते ही लोग गांव के चारागाह का अतिक्रमण कर मकान आदि बनाए जा रहे हैं जिसके कारण गांव के चरागाह लुप्त के कगार पर है और गांव के मवेशी बेसहारा होकर आश्रय के लिए भटकने लग जाते हैं। वह विचरण के लिए गांव की चरागाह भूमि की खूब तलाश करते हैं परंतु जगह नहीं मिलने पर वे मजबूरन मुख्य सड़क पर ही विचरण करने लग जाते हैं। ग्राम बोरला जाटान में चौराहा या जहां-तहां सड़क पर मवेशियों का झुंड देखा जा रहा है। जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है। सड़क पर विचरण कर रहे इन मवेशियों के कारण आए दिन छोटी बड़ी सड़क दुर्घटनाएं हो रही है पर इस ओर ना तो प्रशासन का और ना ही कोई संगठन का इस ओर ध्यान जा रहा है। अगर इस पर नियंत्रण नहीं हुआ तो मुख्य मार्ग पर सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला शुरू होगा जिसने ना केवल पशुधन की क्षति होगी बल्कि राहगीरों का भी जान-माल नुकसान होगा।
नाम के लिये बने गौ-सेवक
जिले भर में आवारा पशुओं के साथ हो रही दुर्घटनाओं को लेकर सड़कों में विरोध करने वाले गौ-सेवक संगठनों को शायद दिखाई नहीं दे रहा है कि बीच सड़क पर बैठ कर आवारा पशु स्वयं दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। जब घटना घट जाती है तब गौ-सेवक जागते हैं। लोगों का कहना है कि गौ-सेवकों को इस विषय पर काम करना चाहिए कि पशु मालिक अपने जानवरो को आवारा न छोड़े, वहीं जानवर रखने का स्थान न हो तो गौ-शाला में भेज दें, लेकिन इस विषय पर काम नहीं करते बल्कि जानवरों के साथ होने वाली दुर्घटना का इंतजार करते हैं और सड़कों पर अपने नाम के लिये विरोध दर्ज करते हैं जबकि गौ-सेवकों को मूल विषय पर काम करना चाहिए जिससे वह काफी दूर हैं।
रात में वाहन चालकों को होती है समस्या
बीच सड़क पर बैठे आवारा पशुओं के साथ होने वाली दुर्घटना के संबंध में लोगों से चर्चा हुई तो उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा रात के समय वाहन चालकों को समस्या होती है। कुछ आवारा पशु ऐसे हैं जिनका रंग काला होता है और बीच सड़क पर झुम्मड़ लगाकर बैठे रहते हैं। तेज गति से आवागमन वाले वाहन चालकों को ये जानवर दिखाई नहीं देते जिसके कारण दुर्घटना घट जाती है। आवारा पशुओं का झुम्मड़ दिखाई नहीं देता हैं, वहीं बीच सड़क पर इक्ठ्ठे बैठ जाते हैं जिसके कारण वाहनो के आवागमन में परेशानियां होती हैं। इन जानवरों को इसी तरह आवारा छोड़कर रखा गया तो एक दिन बड़ा हादसा भी हो सकता है। लोगों का कहना है कि शहर हो या ग्रामीण क्षेत्र सभी मुख्य मार्गों में आवारा पशु बीच सड़क पर बैठ कर दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। इस पर जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत को ध्यान देना चाहिए।
सुबह से रात तक आवारा पशु सड़क पर डटे रहते है और इन्हें सड़क से भगाने की कोशिश में ही दुर्घटनाएं घट जाती है। जब ये आवारा पशु खेतों में घुसकर अव्यवस्था उत्पन्न करते है और इन्हें भागने की कोशिश में लोग भी चोटिल हो जाते है। वहीं मवेशियों के सड़कों पर बैठने पर चालक सीधे वाहन नहीं चला पाते और कई बार मवेशियों को बचाने के चक्कर में दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते है।हालात यह है कि शाम को जब मवेशी सड़क पर बैठते हैं तो वाहनों को निकलने के लिए जगह ही नहीं मिलती। इन मवेशियों के सड़क पर बैठने के कारण वाहन चालक तो दुर्घटनाग्रस्त होते रहते है। साथ ही वाहनों की टक्कर से मवेशी भी घायल होते रहते हैं। इसके साथ ही आवारा पशु जब आपस में लड़ते हैं तो सड़क से पैदल निकल रहे लोगों सहित दो पहिया वाहन चालकों को भय बना रहता है।वही कई बार यह मवेशी सड़क किनारे खड़ी बाइक को गिरा देते, जिससे बाईक में भी टूट फूट हो जाती है।चौराहे या सड़क से गुजरने वाले वाहनों के हॉर्न से कई बार ये बिदक जाते है। जिसकी वजह से ये रोड़ पर दौड़ने लगते हैं और हादसे हो जाते हैं। गांव में आवारा पशुओं का डेरा कभी न खत्म होने वाली समस्या बन गई है। गांव की मुख्य सड़कों पर आवारा मवेशियों का कब्जा होने के पीछे बहुत हद तक पशुपालक भी जिम्मेदार है। मवेशियों से हित साधने के बाद इन्हें सड़कों पर आवारा घूमने के लिए इस तरह छोड़ दिया जाता है। जैसे मवेशी से उनका कोई नाता न हो और दुघर्टना में मवेशी की मौत हो जाने के बाद वे मुआवजा के लिए मवेशियों पर दावा करते है।ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण अपनी गायों को तब तक रखते हैं जब तक वह दूध देती है, जैसे ही गाय दूध देना बंद कर देती है तो वह लोग इन गायों को सड़कों के आसपास छोड़ देते हैं। जिससे सड़कों पर धीरे-धीरे इन आवारा गायों की संख्या बढ़ती जा रही है। अगर ग्रामीण अपने अपने मवेशियों पर ध्यान दे तो सड़कों पर बैठने वाले मवेशियों से छुटकारा मिल सकता है।
अगर समय रहते हैं गांव की प्रमुख सड़को और चौराहों से ये मवेशियों को नहीं हटाया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामवासियों का कहना है कि सड़कों पर बैठे मवेशी के लिए पंचायत प्रतिनीधियों का पंचायत स्तर पर कमेटी बनाकर मवेशी मालिकों से जुर्माना वसूला जाना चाहिए और उनको अपने मवेशी को खुला सड़क पर नही छोड़ने के लिए जागरुक किया जाना चाहिए। वर्तमान में आवारा पशुओं को नजदीकी गौशाला में भेजना चाहिए, मालिक दूबारा मवेशी को सड़क पर छोड़ने पर उनके ऊपर कार्यवाई का प्रावधान करना चाहिए ।