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बारसा सूत्र का वांचन होगा आज, साथ ही संवत्सरी पर्व भी

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मुनिराज रजतचन्द्र विजय म. सा. और मुनि जीतचन्द्र विजय म. सा. पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन शुक्रवार को बारसा सूत्र की 1215 गाथा का वांचन करेंगे ।

                    ऋषभदेव बावन जिनालय झाबुआ में चातुर्मास के दौरान मुनिराज रजतचन्द्र विजय और मुनिराज जीतचंद्र विजय की पावन निश्रा में गत शुक्रवार से प्रारम्भ हुए पर्यूषण पर्व का अंतिम दिन शुक्रवार को संवत्सरी पर्व के रुप मे मनाया जायेगा । शुक्रवार को सुबह प्रभु पूजन, भक्तामर, गुरु चालीसा, मंगल पाठ से प्रारम्भ होगा पूज्य मुनिराज बारसा सूत्र की 1215 गाथा का वांचन करेंगे । मुनि ने बाताया कि जहाँ साधु साध्वी चातुर्मास करते है, वही पर यह सूत्र का वांचन होता है । इस बारसा सूत्र में तीर्थंकरों के जन्म, नामकरण, शिक्षा, दीक्षा कल्याणक, चतुर्विध संघ की स्थापना एवं मोक्ष कल्याणक का विवरण आता है । एक तरह से इस सूत्र में सम्पूर्ण कल्पसूत्र का सार निहित है । मुनि ने कल्पसूत्र वांचन करते हुए महावीर स्वामी, पार्श्वनाथ, नेमीनाथ और आदिनाथ का सम्पूर्ण जीवन चारित्र श्रवण करवाया । 

                    चातुर्मास समिति अध्यक्ष सुभाष कोठारी और सचिव उत्तम लोढ़ा ने बताया कि जैन समाज के सदस्य प्रतिक्रमण कर वर्ष भर हुई त्रुटियों के लिये एक दूसरे से क्षमायाचना करेंगे । प्रवचन सभा में मोहनखेड़ा के कोषाध्यक्ष  हुक्मीचंद बागरेचा रानीबेन्नूर एवं संजय सर्राफ राजगढ़ का गुरु समर्पण चातुर्मास समिति की ओर से शाल, श्रीफल, माला से बहुमान किया । शनिवार को तपस्वियों का बहुमान और सामुहिक क्षमापना का कार्यक्रम होगा । यशवंत, निखिल, शादुल, जिनान्श भंडारी परिवार की ओर से तपस्वियों को पारणा कराये जायेंगे ।

                    मीडिया प्रभारी माणकमल भंडारी ने बताया कि बारसा सूत्र को व्होराने का लाभ, वासक्षेप पूजन का लाभ, सूत्र को वधाने का लाभ, सूत्र की अष्टप्रकारी पूजन, आरती आदि का चढ़ावा बोला गया । मुनि जीतचन्द्र विजय ने केशलोच भी कराया । संचालन संजय मेहता ने किया ।

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