चाहे कितना भी होगा महान नेता
चुनाव में झुकेगा तुम्हें ओ मतदाता
चाहे कितनी भी लालच दे दे
जो कहना है उसे स्पष्ट कह दे
मत उसको ही देना है
जो सच्चा देश सेवक हे
शराब की प्याली मतवाली है
मत के लिए वह धोखे वाली है
सारी तो संशय वाली है
महिला ओ को लुभाने वाली है
मत के लिए हाथ जोड़े हे
नेता जो देश के भगोड़े है
न खाता हू, न खाने देता हूं
लेकिन मे उसे खिला देता हूं
नित नित नियम नए लाएंगे
प्रजा हित की बात कहलाएंगे
पेट्रोल डीज़ल के दाम बढ़ायेंगे
उसी को देश विकास कहलाएंगे
महगाई रोज रोज बढ़ायेंगे
फिर भी प्रजा सेवक कहलाएंगे
हम ही सच्चे राष्ट्रवादी हे
देश की संपति बेच डालेंगे..
कवि गुलाब कहे वहीं प्रिय नेता हे
देश भक्ति के लिए कुर्बानी देता है