दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का हुआ सफलतम् समापन, देश के 6 अलग-अलग राज्यों के विषय विशेषज्ञ ने की भागीदारी।
रामलाल सोलंकी बौद्धिक भारत समाचार छिन्दवाडा़
छिंदवाड़ा शासकीय महाविद्यालय जुन्नारदेव में दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन 14 फरवरी 2022 को किया गया था जिसका सफलतम् समापन 15 फरवरी 2022 को किया गया। संगोष्ठी में देश के 6 राज्य, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक एवं उत्तरप्रदेश के विषय विशेषज्ञों ने सेमीनार के विषय आहार, पोषण एवं मानवीय जीवन पर अपने विचार व्यक्त किये। 14 फरवरी को कुल 06 विषय विशेषज्ञ एवं 05 शोधार्थियों द्वारा शोध पत्रों का वाचन किया गया था। 15 फरवरी को सेमीनार के द्वितीय दिवस मुख्य अतिथि के रूप समाजसेवी विष्णुप्रसाद शर्मा, कवि एवं साहित्यकार राजेश श्रीवास्तव, बिछुआ महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ. आर.पी. यादव, चांद महाविद्यालय से डाॅ. अमरसिंह, पी.जी. काॅलेज छिन्दवाड़ा से डाॅ. चंदेला उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डाॅ. वाय.के. शर्मा द्वारा की गई। सेमीनार के द्वितीय दिवस की समस्त गतिविधियों से सेमीनार संयोजिका डाॅ. रीना मेश्राम एवं सचिव डाॅ. संगीता वाशिंगटन द्वारा अवगत कराया गया। आहार शरीर व दिमाग दोनों को चाहिए आहार से विचार, विचार से व्यवहार, व्यवहार से जीवन की दिशा निर्धारित होती है – डाॅ. अमर सिंह -* चांद महाविद्यालय से पधारे डाॅ. अमरसिंह द्वारा तृतीय एवं चतुर्थ सत्र के प्लेनरी सेशन एवं विद्यार्थियों से विचार विमर्श के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों के प्रश्नांे का जबाब अपने अंदाज में दिया जिसमें उनके द्वारा कहां गया कि आहार शरीर व दिमाग दोनों को चाहिए, आहार से विचार, विचार से व्यवहार व व्यवहार से जीवन की दिशा निर्धारित होती है। साथ ही कहां कि सारी कवायद मनुष्यता को बचाने की है आपाधापी में है और हम खत्म हो जाएं और सब कुछ बचा जाए ऐसा हमें मंजूर नहीं है। अपनी पंक्तियों को आगे बढ़ाते हुऐ कहां कि आहार प्राथमिक आवश्यकता है, सबसे बड़ा धन स्वास्थ्य है हम प्रकृति की आवश्यकता से दोगुना खाते हैं। हमारी संगत में शुद्ध विचार और पंगत में आहार न हो तो ऐसा भोजन हमें पंसद नहीं है। आहार में विष घोल दे तो उपचार संभव है, किंतु विचार में विष घोल दिया जाए तो उपचार संभव नहीं है। हमें जीवित रहने के लिए खाना चाहिए, खाने के लिए जीवित नहीं रहना चाहिए। इस प्रकार उन्होंने पोषण आहार से मानवीय जीवन किस प्रकार प्रभावित होता है और किस प्रकार का आहार दिनचर्या के लिए जरूरी है पर विचार रखे। डाॅ. चंदेला द्वारा भगवत गीता की चैपाईयों और श्री कृष्ण की बाल लीलाओं के खानपान के माध्यम से आहार, पोषण एवं मानवीय जीवन पर प्रकाश डाला। यंग साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित हुई डाॅ. आकांक्षा – महाविद्यालय की शोध संगोष्ठी में विषय विशेषज्ञ के रूप में बेंगलूरू से पधारी डाॅ. आकांक्षा शर्मा, बी.एन.वाय.एस.वी.वाय.ए.एस.ए. संस्थान बेंगलूरू द्वारा सबसे कम आयु 24 वर्ष में विषय विशेषज्ञ के रूप में अपने शोध पत्र को प्रस्तुत कर उपस्थितजनों को आहार, पोषण एवं मानवीय जीवन शैली से संबंधित विषयों पर प्रकाश डाला गया साथ ही महिलाओं के पोषण एवं आहार में तुलनात्मक अध्ययन के द्वारा उनकी डाइट कैसी होनी चाहिए इस पर अपने विचार रखे। उनके द्वारा संगोष्ठी में प्रस्तुत किये गये शोध पत्र के लिए उन्हें यंग साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया। गृहविज्ञान विभाग की बड़ी उपलब्धि 6 राज्यों के विषय-विशेषज्ञ हुये सम्मिलित – शासकीय महाविद्यालय जुन्नारदेव के गृहविज्ञान विभाग द्वारा प्रथम बार आयोजित किये गये राष्ट्रीय सेमीनार में 6 राज्यों से विषय विशेषज्ञों का आना और अपने विचारों को रखना निश्चित तौर पर गृहविज्ञान विभाग की बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए महाविद्यालय प्राचार्य सहित आंगतुक अतिथियों द्वारा गृहविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष एवं सेमीनार की संयोजिका डाॅ. रीना मेश्राम को बधाई प्रेषित की गई। साथ ही गृहविज्ञान विभाग की छात्राओं को भी इस सफल आयोजन में उनके द्वारा दिये गये सहयोग के लिए संयोजिक एवं स्टाॅफ द्वारा सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डाॅ. मेश्राम द्वारा कहां गया कि यह सेमीनार किसी एक की उपलब्धि नहीं बल्कि पूरे महाविद्यालय परिवार और इस सेमीनार में आये समस्त विषय-विशेषज्ञ, शोधार्थी, छात्र/छात्राएं एवं अतिथियों की उपलब्धि है। उन्होंने कहां कि एक-एक फूल से फूलों की माला तैयार होती है और वह फूल मेरे शोध संगोष्ठी में शामिल हुये लोग है एवं माला मेरी शोध संगोष्ठी है जिसे सफलता और उन्नति प्रदान की है। आयोजन सचिव द्वारा प्रेषित किया गया आभार -, कार्यक्रम समापन अवसर पर आयोजन सचिव डाॅ. संगीता वाशिंगटन द्वारा महाविद्यालय परिवार के साथ-साथ समस्त आंगतुक अतिथियों, शोधार्थियों, छात्र/छात्राओं, प्रशासनिक अधिकारियों एवं मीडिया को धन्यवाद एवं आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम अध्यक्ष डाॅ. शर्मा की अनुमति से कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान द्वारा किया गया।