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पढ़ेगा इंडिया तभी बढ़ेगा इंडिया, लेकिन शासकीय स्कूल में झाड़ू लगा रहे बच्चे

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दिलीप बिरला बौद्धिक भारत बड़वाह

बडूद प्राथमिक स्कूल में बच्चे झाडू लगा रहे है । शिक्षा को लेकर सरकार बड़े बड़े दावे करती है सरकारी शालाओं के बच्चो को बेहतर व्यवस्था और शिक्षा मिल सके इसके लिए करोड़ों रूपए का बजट खर्च किया जा रहा है। सरकारी स्कूल में पढ़ाई की जगह बच्चे लगा रहे झाड़ू । प्राथमिक विद्यालय में स्कूली बच्चे पढ़ाई की जगह झाड़ू लगाते नजर आते है वही इससे राज्य शिक्षा की पोल खुल रही है स्कूल प्रभारी रेखा पटेल खुद खड़े रह कर छात्राओं से झाडू लगवा रही है प्रभारी होने के बावजूद स्कूल में नौनिहाल बच्चो से काम कराया जा रहा है प्रभारी रेखा पटेल से पूछने पर बताया जाता है झाडू बच्चे नही लगाए तो और कोन लगाएगा ।शिक्षा के मंदिर में बच्चो के हाथ में कलम की जगह झाडू होगी तो पढ़ेगा इंडिया बढ़ेगा इंडिया का सपना कोरा रहने की आशंका गहरा जाती है। क्षेत्र की प्राथमिक स्कूल में बच्चे झाडू लगा रहे है। जनपद पंचायत अंतर्गत संचालित शालाओं में सफाई कर्मी न होने से बच्चे रोजाना पहले झाडू , पौछा करते है फिर पढ़ाई करते है। ताजा मामला ग्राम बडूद में संचालित शासकीय स्कूल का है जहां शिक्षिका और प्रभारी की मौजूदगी में बच्चे शाला परिसर में झाड़ू लेकर साफ सफाई कर रहे थे।
स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश का उलंघन – मानव अधिकार आयोग की अनुशंसा पर स्कूल शिक्षा विभाग ने पूर्व में एक आदेश जारी किया है, सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों से झाडू पौछा करवाने या बर्तन धुलवाने पर संबंधित स्कूल के हेड मास्टर और प्राचार्य की वेतनव्रद्धि रोक दी जाएगी । साथ ही भविष्य में पदोन्नति भी नही हो सकेगी। विद्यार्थियों से शिक्षा व खेल के अलावा कोई काम नहीं करवाया जा सकता है। आदेश का उलंघन होने पर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी । स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश के बावजूद भी शासकीय शालाओं में ऐसी गतिविधियां देखने को मिल रही है।
प्राथमिक विद्यालय बडूद कक्षाओं में शिक्षक नही होने से बच्चे कक्षा के बाहर घूमते नजर आए – नौनिहालों की पढ़ाई भगवान भरोसे चलने लगी है जहां प्रशासन लाखो रुपए वेतन के रूप में शिक्षको को दे रहा है। दूसरी ओर शासकीय विद्यालय में शिक्षक समय पर कक्षाओं में नही पहुंचते है। इस कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। गौरतलब है की सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए शासन ने आधा घंटा पहले तथा इतने समय ही बाद तक कक्षा संचालन शुरू होने के निर्देश जरूर दिए है लेकिन उन पर पूरी तरह अमल नहीं हो रहा है जारी आदेश के अनुसार स्कूल सुबह 10.30 को लगाना चाहिए लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। स्कूल परिसर में बच्चो द्वारा पढ़ाई छोड़कर झाडू लगाई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल समय नही खुलते है कही जगह स्कूल खुलने के बाद भी शिक्षक कक्षाओं में नही पहुंचते है कही बच्चे शिक्षक के आने के इंतजार कर रहे है तो कही प्रयाप्त संख्या में बच्चे ही नही पहुंच थे ।शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में स्तिथ विद्यालयों की समय पर निरीक्षण नही किए जाने के कारण बच्चो की पढ़ाई के हाल बेहाल है।
सरकारी स्कूल में पढ़ाई की जगह बच्चे लगा रहे झाड़ू –खरगोन जिले के बड़वाह तहसील के बडूद क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय में स्कूली बच्चे पढ़ाई की जगह झाड़ू लगाते नजर आते है वही इससे राज्य शिक्षा की पोल खुल रही है स्कूल प्रभारी रेखा पटेल खुद छात्राओं से झाडू लगवा रही है प्रभारी होने के बावजूद स्कूल में नौनिहाल बच्चो से काम कराया जा रहा है प्रभारी से पूछने पर बताया जाता है झाडू बच्चे नही लगाए तो और कोन लगाएगा, ये पूछने वाले आप कोन होते है।
प्राथमिक स्कूलों का समय – ज्ञात हो की सरकारी प्राथमिक स्कूलों का समय सुबह 10.30 से शाम 4.30 बजे तक किया गया है।शिक्षको को 10 बजे से 5 बजे तक स्कूल में उपस्थित रहने के नियम है । शासन प्रशासन के आदेश का जमीनी स्तर पर कितना पालन हो रहा है।
शासकीय हाई स्कूल भवन जर्जर, हो सकता है हादसा – क्षेत्र के हाई स्कूल के भवन की हालत काफी जर्जर है । यहां स्कूल की हालत काफी जर्जर है दिवारी टूटी हुई है फिर भी बच्चे यहां पढ़ते है ऐसा नहीं है की जिले के अधिकारियों को इस बात की जानकारी नहीं है, सब कुछ पता होने के बाद भी सुधार नहीं कराया गया । प्राचार्य का कहना है की उनके द्वारा लगातार पत्राचार किया जा रहा है , भवन के जर्जर होने कारण अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने में काफी डरते है।
हाई स्कूल परिसर में शोपीस बनी पानी की टंकी – बडूद हाई स्कूल के परिसर में बना ओवरहेड टैंक पिछले कई साल से शोपीस बना हुआ है। टैंक का निर्माण लगभग 12 से 15 वर्ष से किया गया है लेकिन इतने साल बाद भी टैंक में एक बूंद पानी नहीं चढ़ सका।
बाउंड्रीवाल न होने से स्कूल परिसर में धमाचौकड़ी करते है छुट्टा पशु – क्षेत्र के हाई स्कूल में बाउंड्रीवाल नही बना है , गेट भी नही लगा है। इससे छुट्टा पशु सुबह शाम दोपहर के समय में धमाचौकड़ी करते रहते है । बच्चो को भी खतरा बना रहता है । शिक्षको और बच्चो ने बाउंड्रीवाल ओर गेट की मांग की है
हाई स्कूल में नही है हैंडवास यूनिट – बच्चों को स्वच्छता का संदेश देने स्कूलों में हाथ धोने के लिए हैंडवाश यूनिट बनवाई गई थी। लेकिन हाई स्कूल बडूद में हैंडवास यूनिट ही नही है। ना तो नल कनेक्शन है और ना ही पानी की व्यवस्था है। ऐसे में बच्चों को हाथ धोने के लिए स्कूल परिसर में स्थित हैंडपंप पर जाना पड़ता है। हैंडवाश यूनिट इस उद्देश्‍य के साथ लगाए गए थे कि जब बच्चा स्कूल जाये तो हाथ धोकर ही अंदर प्रवेश करें जिससे कोरोना महामारी के संक्रमण से भी बचा जा सके लेकिन कोरोना काल के बाद ये सुविधा और भी बदहाल हो गई।
हाई स्कूल में शिक्षको की कमी – सरकार शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी सरकार की कोशिशों पर पानी फेर रही है। हाई स्कूल में 6 टी से 10 वी कक्षा तक मात्रा 5 शिक्षक है। शिक्षको की कमी के कारण 9 वी कक्षा में एक ही सेक्शन में लगभग 78 बच्चे एक साथ पढ़ रहे है। 6 टी कक्षा में शिक्षक नही होने पर बच्चो द्वारा ही अन्य बच्चो को पढ़ाते हुए नजर आ रहे थे।
स्कूलों की काया बदली, पर अभी भी टाट-पट्टी पर बैठ रहे विद्यार्थी – शिक्षा विभाग के स्कूलों में सुविधाओं के बड़े दावों के विपरीत विद्यार्थी टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। यहां विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था नहीं है। बारिश के दिनों में सीलन होने पर जमीन पर बैठने में परेशानी होती है।
हमेशा दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है– विद्यालय के आसपास कोई संकेतक स्पीड ब्रेकर नहीं, दुर्घटना की आशंका – बडूद हाई स्कूल स्कूल खरगोन मुख्य मार्ग पर है आसपास किसी भी किस्म के संकेतक, स्पीड ब्रेकर नहीं बना है और न ही स्कूल गेट और न बाउंड्रीवाल है इससे स्कूल के निकट भी वाहन तेजी से दौड़ते हैं। इससे हमेशा दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। प्रशासन ने इस ओर ठोस कदम नहीं उठाया है।सड़क सुरक्षा के मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं-ग्राम बडूद में मुख्य मार्ग पर दो शासकीय स्कूल एवम 2 निजी स्कूल है इन स्कूलों में हजारों बच्चे पढ़ते हैं। इन स्कूलों के पास सड़क सुरक्षा के मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमानुसार स्कूल के दोनों तरफ 20-20 मीटर की दूरी पर आगे स्कूल है, वाहन धीमे चलाएं, कृपया हार्न न बजाएं आदि संकेतक लगाए जाते हैं। इसके साथ ही स्कूल के प्रवेश गेट के दोनों तरफ रंबल स्ट्रिप व स्पीड ब्रेकर बनाए जाते हैं। सुबह बच्चों के प्रवेश व दोपहर में छुट्टी के समय विशेष सावधानी बरती जाती है, ताकि कोई अनहोनी न हो। मगर यहां तो मानक ही ताक पर रख दिए गए हैं।किसी भी स्कूल के निकट संकेतक नहीं हैं। नियमानुसार स्कूल के सामने से निकलते समय वाहनों की स्पीड 20 किमी प्रति घंटा होनी चाहिए। मगर स्कूलों के सामने से वाहन फर्राटे से दौड़ते हैं।

भवन क्षतिग्रत एवम जर्जर भवन ध्वस्त करने और बाउंड्रीवॉल स्कूल गेट लगाने के संबंध में कई बार पत्राचार किया गया है, अभी 31 जुलाई को श्रीमान परियोजना अधिकारी को पत्र के द्वारा अवगत कराया गया है की संस्था शासकीय हाई स्कूल बडूद का भवन करीब 35 वर्ष पुराना है भवन की सभी दिवारे जीर्ण शीर्ण एवम छत भी क्षतिग्रस्त हो गई है आए दिन छत का प्लास्टर भी गिरता रहता है है । शाला में करीब 220 बच्चे अध्ययनरत है। कक्षा 6 से 10 तक की कक्षाएं संचालित हो रही है। क्षतिग्रस्त भवन में शाला की कक्षाएं नही लग रही है। उनमें खिड़की , दरवाजे भी टूटे है, असामाजिक तत्व के लोगो का अड्डा बन गया है । पूर्व में भी इसकी जानकारी कई बार दे चुके है । एसडीएम महोदय द्वारा भी निरीक्षण किया गया है। कभी भी कोई दुर्घटना की संभावना बनी रहती है – प्रिंसिपल रेवाराम वर्मा
प्राचार्य ने बताया पूर्व में विद्यालय के 10 वी के छात्र अंकित पिता राजू वर्मा को जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में इंस्पायर अवार्ड मानक प्रोग्राम में आइडिया दिया गया था डैस कैम यानी डेसबोर्ड पर लगे कैमरे का काम गाड़ी चलाते समय आस पास हो रही गतिविधियों पर निगरानी रखना है इससे कई बार एक्सीडेंट के दौरान आपके पास प्रूफ रहता है जिससे किसी प्रकार की कोई दिक्कत नही होती है । डैस कैमरा एक ऑप्टिकल उपकरण है जिसका उपयोग छवियों को रिकार्ड करने के लिए किया जाता है कैमरे में छोटे छोटे छेद के साथ सील बक्से है जो प्रकाश संवेदनशील सतह पर एक छवि को कैप्चर करने के लिए प्रकाश करते है । इस आइडिया पर 10000 का अवार्ड भी अंकित को मिला था।स्कूल बाउंड्री को लेकर दो तीन बार आ भी चुके है उसके बाद भी कोई निराकरण नहीं हुआ है। बडूद हाई स्कूल पहले क्षेत्र की बड़ी स्कूल हुआ करती थी और पूर्व में यह हायर सेकेण्डरी स्कूल थी जिसे बाद में हाई स्कूल करदिया गया।

शासकीय स्कूल में कोई भी बच्चे झाड़ू नही दे सकते है- प्रताप कुमार अगसिया एसडीएम बड़वाह

शासकीय स्कूलों में बच्चे झाडू नही दे सकते है अगर ऐसा कुछ मामला है तो शिक्षक को समझाइश देंगे व जवाब मांगेंगे नही तो कार्यवाही करेंगे – मेवाराम बर्मन बीआरसी बड़वाह

शासकीय स्कूल में बच्चो द्वारा झाडू लगाने के संबंध में जिला कलेक्टर एवम जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क करना चाहा लेकिन बात नहीं हो पाई

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