रामलाल सोलंकी बौद्धिक भारत बड़वानी
25 जुलाई 2024। नव निर्वाचित भारत सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए 23 जुलाई 2024 को अपना पहला पूर्ण बजट प्रस्तुत किया । इस बजट में सरकार से उम्मीद थी की देश में स्वास्थ्य की स्थिति को देखते हुये वह जन स्वास्थ्य को मजबूत करने की दिशा महत्वपूर्ण कदम उठाएगी परंतु हमेश की इस केंद्रीय बजट में भी स्वास्थ्य के लिए कुछ खास प्रावधान नहीं किया गए है। केंद्र सरकार के बजट प्रावधान में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और निजी स्वास्थ्य सेवाओं के नियंत्रण के बारे कुछ भी नहीं कहा गया है। देश में आबादी के अनुसार सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र और इनमे प्रशिक्षित चिकित्सकों की संख्या जरूरत से बहुत कम है, परंतु बजट में कोई प्रावधान दिखाई नहीं देता है। साथ ही प्राथमिक सेवाओं के लिए महत्वौर्ण योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को भी अनदेखा किया गया है, जिसका सीधा असर जनता के स्वास्थ्य पर पड़ेगा और उन्हे मजबूरन निजी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज लेने के लिए जाना होगा।
हम सभी जानते है है देश में निजी स्वास्थ्य संस्थान बड़े पैमाने पर महंगी दरों स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान कर रहे जिन पर कोई नियंत्रण नहीं है और न ही कोई प्रयास दिखाई दिया है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार देश में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की स्पष्ट वकालत कर रही है। केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य के लिए 2% से कम का प्रावधान किया गया है और इस साल 1869 करोड़ रुपये की वृद्धि बहुत कम है। केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य का हिस्सा 2021-22 के 2.36% से घटकर 1.96% रह गया है। पिछले साल के बजट अनुमान से वृद्धि केवल 0.33% है, जबकि संशोधित अनुमान में 12% की वृद्धि दिखाई गई है। सरकार ने कैंसर की महज 3 दवाओं को सीमा शुल्क से राहत दी है। सरकार ने कुछ एक्स –रे मशीनों पर भी कर से राहत दी है, जिसका सीधा असर जनता के स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। वर्ष 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के अनुसार वर्ष 2024-25 तक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकाल घरेलू उत्पाद का 2.5% खर्च करने का लक्ष्य सरकार ने तय किया था, परंतु सरकार के इस बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र में वर्तमान बजट अनुमान इस लक्ष्य के आस पास भी नहीं है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार अभियान (जन आंदोलनो का राष्ट्रीय समन्वय) के साथी व स्वास्थ्य विशेषज्ञ अमूल्य निधि ने कहा कि सरकार ने नए अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र खोलने के बारे में इस बजट में कोई नई घोषणा नहीं की है, क्योंकि भारत सरकार ने मौजूदा जिला अस्पतालों को भी निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया है, जिसका पालन कुछ राज्यों ने शुरू भी कर दिया है, हाल ही में मध्य प्रदेश भी कुछ जिला अस्पतालों को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकार अभियान (जन आंदोलनो का राष्ट्रीय समूह) सरकार से मांग करता है कि देश में जन स्वास्थ्य की मजबूती के के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में बजट प्रावधान मे पर्याप्त वृद्धि करे और सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को निजी हाथों में देने की प्रक्रिया को जनहित में बंद किया जाए।
भवदीय
अमूल्य निधि / राजकुमार सिन्हा / राहुल यादव