भीनमाल भारत विकास परिषद् एवं मारवाड़ चेतना फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन
ललित होंडा बौद्धिक भारत भीनमाल
भीनमाल हिन्दी पत्रकारिता दिवस के उपलक्ष में भारत विकास परिषद् एवं मारवाड़ चेतना फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन स्थानीय विकास भवन में किया गया, जिसमें राष्ट्रीय कवि-गीतकार दिनेश सिन्दल ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से समा बांधा। उन्होंने गीत की विकास यात्रा पर बात करते हुए कई नवगीत व पारम्परिक गीत सुनाऐं। देह के मन गिने, मनके नहीं मन के, रुप की इन आंधियों में नेह के तिनके। फसल जो हमने ऊगाई है, आदमी भी बोनजाई है एवं मैं तुम्हें भी सोचता कुछ इस तरह जैसे नवगीत सुनाऐं। हिन्दी पत्रकारिता दिवस की प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए उन्होंने सूरज हॉकर के हाथों से आया मेरे द्वार, दर्द ने फिर छापा अखबार रचना सुनाकर वाहवाही लूटी। उन्होंने हिन्दी गजल की पर बात करते हुए कहा कि फूल हूंॅ संग मैं खुशबू का सफर लाया हंॅू, मैं हवाओं पर तेरा नाम लिखने आया हँूॅ। ये हवा दिन भर तो आवारा धुऐ के साथ थी, शाम को ये बाद में कपड़े बदलने आ गई आदि गजल भी सुनाई। कार्यक्रम के प्रारंभ में मारवाड़ चेतना फाउंडेशन के संस्थापक कन्हैयालाल खण्डेलवाल ने सिन्दल की साहित्य की यात्रा परिचय दिया । भारत विकास परिषद् के अध्यक्ष डॉ. अक्षय बोहरा ने स्वागत किया। डॉ. प्रेमराज परमार, ओम प्रकाश खेतावत, नैनाराम चौहान, परसराम कंसारा, अशोक धारीवाल, सुरेश सोलंकी ,महेन्द्र शर्मा आदि ने परिषद् द्वारा सिन्दल का साफे, शॉल व माला द्वारा स्वागत किया। इस अवसर पर महेश व्यास, किशोर सिंह राजपुरोहित, कवि दिनेश जालोरी, ललित होण्डा, सतीश सुन्देशा, सुमित बाहेती, प्रभुराम पंचाल,डॉ. रोहित परमार, अरुण फुलवारिया, बीमा निगम के वरिष्ठ प्रबंधक मूलशंकर सहित कई लोग उपस्थित थे। संचालन डॉ. प्रेमराज परमार ने किया।