भीनमाल ।
स्थानीय महावीर स्वामी जैन मंदिर प्रांगण से पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व की समाप्ति के पश्चात पांच कर्तव्यों में से एक कर्तव्य के तहत गुरुवार को चैत्य परिपाटी का आयोजन किया गया ।
इस अवसर पर जैन समाज के हजारों श्रद्धालुओं के साथ शोभा यात्रा का आयोजन किया गया । जैन साध्वी मुक्तिदर्शिता म सा आदि ठाणा के साथ शहर के मुख्य मार्गो से होकर रास्ते के जिन मंदिरों के दर्शन वंदन करते हुए कोठारी कीर्ति स्तम्भ में पंहुचे । वहां पर जैन साध्वी मुक्तिदर्शिता म सा के सानिध्य में शंत्रुजय तीर्थ की वंदना करते हुए चैत्यवंदन किया । जैन साध्वी मुक्तिदर्शिता म सा ने बताया कि आज चारों ओर हिंसा, लडाई-झगड़े, अशान्ति, लोभ और राग-द्वेष के भाव पनप रहे हैं । इनसे बचने के लिए अहिंसा के सिद्धांत पर चल कर ही विश्व शांति को पा सकते हैं । उन्होंने पर्यूषण पर्व पर अपनाये जाने वाले पांच कर्तव्यों की जानकारी भी दी । जिसमें अमारी प्रवर्तन, साधार्मिक वात्सल्य, क्षमापना, अठ्ठम तप और चैत्य परिपाटी की चर्चा की ।
न्यासी माणकमल भंडारी ने बताया कि चैत्य परिपाटी के अवसर पर बस्तीमल कांनूगो परिवार की ओर से राज रविन्द्र भवन में पूरे जैन समाज के लिए स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया । इस अवसर पर स्थानीय जैन समाज के अलावा आस-पास क्षेत्र के अनेक गांवों एवं कस्बों के जैन संघों के श्रद्धालुओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई ।
इस अवसर पर मदनराज पालगोता, भंवरलाल कानूंगो, माणकमल भंडारी, कपूरचंद, पृथ्वीराज बाफना, भंवरलाल, बाबूलाल, किरण, मुकेश, महेन्द्र सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थित रही ।