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उत्कृष्ट शिक्षा संस्थान हॉस्टल चुना भट्टी के भूतपूर्व छात्रों का 20 साल बाद हुआ मिलन समारोह का आयोजन

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रामलाल सोलंकी बौद्धिक भारत बड़वानी

उत्कृष्ट शिक्षा संस्थान हॉस्टल चुना भट्टी की स्वर्णिम स्मृतियों को अपने जहन में ताजा करते हुए भूतपूर्व छात्रों ने २० वर्ष बाद किया मिलन समारोह का सफल आयोजन। यह आयोजन धामनोद फॉरेस्ट रेंज कि खुबसूरत वादियो मे काकड़वा रेंज में स्थित सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच में वर्ष 2001 से 2007-08 की बेंच के छात्रों ने लगभग 20 वर्षों बाद अपने साथियों से मुलाकात की। कार्यक्रम के आयोजन मे शामिल भूतपूर्व छात्रों ने बाताय कि हमें स्कूल से निकले लगभग 20 से 24 वर्ष हो गए हैं ,इस खूबसूरत आयोजन के लिए पिछले कई वर्षों से सभी साथी मित्र लगातार प्रयास कर रहे थे ,जो आज एक सफल आयोजन में परिवर्तित हुआ। उत्कृष्ट विद्यालय के अनुशासन की पाठशाला के विद्यार्थियों का लगभग 80 से भी अधिक छात्रों का एक व्हाट्सएप ग्रुप है जिसकी वजह से सभी पुराने साथी लोग आपस मे चर्चा करते हैं और सभी साथियों की सहभागिता से कार्यक्रम का सफल आयोजन आज माउंट व्यू में हुआ। इस अवसर पर सभी ने अपनी पुरानी यादों को याद करते हुए अपने छात्र जीवन एवं हॉस्टल जीवन के किस्से सुनाए। गीत गाये, शायरियां सुनाई, पुरानी यादो की स्मृतियों एवं किस्सो ने पूरे वातावरण को अतीत के गलियारों में लाकर खड़ा कर दिया। साथ ही भूतपूर्व छात्रों ने खूबसूरत नृत्य भी किया। सभी साथी एक दूसरे के हाल-चाल पूछते नजर आ रहे थे और कैमरा मेन उनके पल-पल के लम्हों को अपने कमरे में कैप्चर कर रहे थे।
सभी भूतपूर्व छात्रों ने अपने छात्रावास के दिनो के लम्हों को याद कर पुराने स्मृतियो एवं लम्हो को सुनाया उन्हें सुन ऐसा लगा जैसे मानो वापस अतीत में वह चले गए हो । इन्ही संघर्षशील छात्रों में से आज अधिकांश छात्र शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग, कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग एवं राजस्‍व विभाग के साथ ही अन्य सभी विभागों मे बड़े बडे पदो पर आसिन होकर अपने स्कूल, हॉस्टल के साथ-साथ अपने अपने गुरु जनो एवं माता-पिता का नाम रोशन कर रहे हैं। इन्हीं अतीत की यादों को सजोते हुए उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के आयोजन को निरंतर जारी रखना की भी बात कही। कार्यक्रम का आयोजन मोहित पाटोदे के मार्गदर्शन मे लखन सोलंकी, उदय सिंगोरिया एवं उनकी टीम द्वारा सबकी सहभागिता से किया गया । कार्यक्रम का संचालन भू गर्भ वैज्ञानिक मुकेश बामनिया एवं डॉ॰ खेमेन्द्र रोकड़े ने किया।

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