श्री गोकरूणा संत सत्कार समारोह में राजपुरोहित समाज ने देशभर से आए संतों का किया सत्कार, संतों के सत्कार से ईश्वर प्रसन्न होते है: गोऋषि स्वामी दत्तशरणानंद जी महाराज
गाय और ब्राह्मण सनातन धर्म की जड़ है: मलूक पीठाधीश्वर, नंदगांव में संतों के सत्कार में जुटेगा हर वर्ग
गणपत दवे बौद्धिक भारत सांचौर
रेवदर। श्री मनोरमा गोलोक नंदगांव केसुआं में चल रहे श्री गोकरुणा चातुर्मास आराधना महोत्सव में हिन्दु समाज के हर वर्ग को गोसेवा से जोड़ने के प्रयास में आज श्री गो करूणा संत सत्कार समारोह का आयोजन हुआ। समारोह में भारत वर्ष के ज्ञानी, ध्यानी, सिद्ध तपोनिष्ठ साधू, संत व महापुरूषों का राजपुरोहित समाज द्वारा विशेष पुजा अर्चना कर आदर सत्कार किया गया। देशभर से आए महाभाग्यशाली धर्मात्माओं ने परम पुज्य जगद्गुरु द्वाराचार्य मलुक पीठाधीश्वर स्वामी राजेन्द्र दास जी महाराज, सुरजकुंड के परम पुज्य सिद्ध संत श्री अवधेश चैतन्य जी महाराज, परम पूज्य तपोनिष्ठ स्वामी श्री चेतनानंदजी महाराज डण्डाली आबुराज सहित अयोध्या, मथुरा, वृन्दावन, हरिद्वार, चित्रकूट, काशी, पुरी व 121 दंडी स्वामी सहित सैकङों यतीवृन्द संत महात्माओं का तिलक अर्चन साष्टांग दण्डवत प्रणाम कर विधिवत सत्कार संपन्न हुआ। संत सत्कार समारोह में गोऋषि स्वामी दत्तशरणानंद जी महाराज ने हिन्दु समाज के हर वर्ग को गोसेवा के इस पावन अभियान से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर को प्रसन्न करना है, तो साधु-संतों का सम्मान करना जरूरी है। साधु-संतों का सम्मान ही ईश्वर की प्रसन्नता का दूसरा रूप है। मानव जीवन में ब्राह्मण के आचरण पर प्रकाश डाला। समाज को गोमाता की उपयोगिता और महत्व को समझाते हुए सरकारों के दायित्वों के बारे में अवगत कराया। इस दौरान परम गो उपासक मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज ने राजपुरोहित समाज द्वारा आयोजित संत सत्कार समारोह को संबोधित करते हुए बताया कि आपके पूर्वज तपोनिष्ठ, अलोलूप, अपरिग्रही ब्राह्मण रहे है। ब्राह्मण का कर्तव्य है कि अनेक कष्टों को सहते हुए अपने धर्म का पालन करना और धर्मावलंबन में शरीर इत्यादि को जो कष्ट होता है उसिको तप कहते है। गाय और ब्राह्मण सनातन धर्म की जड़ है। ब्राह्मण को ब्राह्मणत्व वेदलक्षणा गौवंश के आश्रित रहने से ही प्राप्त होता है। महाराजजी ने विशेष बताया कि राजधर्म भी तभी सुरक्षित रहेगा जब वेदलक्षणा गौवंश सुरक्षित होगा। राजधर्म के केंद्र में वेदलक्षणा गौवंश नहीं है, तो ऐसे शासन को राजधर्म सिखाने के लिए ब्रह्म समाज तत्पर रहें। इस अवसर पर गोवत्स विठ्ठल कृष्ण महाराज, ब्रह्मचारी मुकुंद प्रकाश महाराज, आहोर विधायक छगन सिंह, रघुनाथसिंह शिवतलाव, अर्जुन सिंह जी तिवरी, केवलजी पालङी, प्रताप जी जेतपुरा, डूंगराराम जी बिछावड़ी, खंगाराराम जी खिरोड़ी, जसराज वाली, ब्रह्मदत्त नानरवाड़ा सहित समाज के कई गणमान्य गोभक्त मौजुद रहे।
समारोह में भामाशाहों का हुआ सम्मान – इस भव्य अनुष्ठान के तहत श्री गोकरूणा संत सत्कार समारोह में जिन-जिन भामाशाहों ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया। उन सभी भामाशाहों का श्री मनोरमा गोलोक तीर्थ नंदगांव की ओर से आशीर्वाद एवं सम्मानित किया गया। राजपुरोहित समाज के भामाशाहों ने चातुर्मास महोत्सव में दैनिक गोपुजन अर्चन, साधु, संत, महात्माओ व अतिथियों के सत्कार, भजन, साधन, सत्संग एवं आवास सहित आगन्तुक हजारों श्रद्धालुओं हेतू भोजन प्रसाद की व्यवस्थाओ में सेवा निधि गो करूणा चातुर्मास संयोजक समिति को प्रदान की गई। इस चातुमार्स में श्रीभरत चरित्र कथा मनोरथी देवाराम जागरवाल कैलाशनगर व अन्नपुर्णा भोजन प्रसाद मनोरथी दलपत राजपुरोहित मण्डवारिया रहे। इस कार्यक्रम में हजारों गोभक्तों ने हिस्सा लिया। जिसमें भारी संख्या में मातृ शक्ति भी शामिल रही। देशभर के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे हुए गोभक्तों ने कार्यक्रम में अहम भूमिका निभाई। संत समारोह का मुख्य उद्देश्य हर वर्ग को गोसेवा से जोडना है।
आगामी दिनों में हिन्दु समाज का हर वर्ग करेगा संतों का सत्कार – गोसेवा के इस पावन अभियान को परम श्रद्धेय गोऋषि स्वामी दत्तशरणानंद महाराज के अथक प्रयासों से अब हिन्दु समाज के हर वर्ग को जोड़ने की अभिनव कड़ी में श्री गो करूणा संत सत्कार समारोह का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें अलग -अलग समय पर हर वर्ग के समस्त गोभक्तों के द्वारा संतों का आदर सत्कार किया जायेगा। समारोह में प्रथम चरण में राजपुरोहित समाज के बाद अब राजपुत, प्रजापत, घांची, माली व सुथार समाज का कार्यक्रम आगामी दिनों में प्रस्तावित है। इस प्रकार हर समाज को संत सत्कार समारोह की अलग अलग दिनांक दी जा रही है। जिसमें इस चातुमार्स में देशभर से आए सभी संतों का तिलक भेंटकर, दुपट्टा व शॉल द्वारा समाज के सभी वर्गों द्वारा सत्कार किया जा रहा है। समारोह के पहले दिन राजपुरोहित समाज की ओर से सभी संतों का आदर सत्कार किया गया।


