नर्मदा बचाओ आंदोलन के द्वारा खरगोन बड़वानी लोकसभा सांसद गजेन्द्र सिंह पटेल व विधायक राजन मंडलोई को नर्मदा व किसानों के मुद्दे पर ज्ञापन दिया गया
रामलाल सोलंकी बौद्धिक भारत बड़वानी
आज भी सरदार सरोवर परियोजना के प्रभावित का कानूनी पुनर्वास नही हुआ है, आज भी हजारों परिवारों को कुछ कुछ मिलना बाकी हैं। पिछले साल तक जैसी डूब नही आने चाहिए नही तो आंदोलन जल सत्याग्रह किया जायेगा। आज भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश 2000,2005,2017 व नर्मदा ट्रिब्यूनल फैसला, राज्य की पुनर्वास नीति, मध्यप्रदेश राज्य के आदेश 05जून 2017 से 01अगस्त 2017 के आदेश का कानूनी पालन नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के द्वारा नही किया गया है। इसका संपूर्ण पालन होने के बाद ही डूब आए। इसके साथ ही किसानों के 19प्रमुख मागों के साथ ही बडवानी विधायक राजन मंडलोई को ज्ञापन दिया गया कहा गया था उनके पार्टी के सांसदों के इस मुद्दे पर सांसद में सवाल उठा जाए। किसानों को, वंचना के कारण आज तक कर्जदारी भुगतनी और आत्महत्याएँ जारी रखनी पड़ी है| किसानी में लगे खेतीहर भूमिधारी और खेतमजदूरों को एक बार ‘संपूर्ण कर्ज माफी’ दी जाए| इसके लिए लोकसभा और राज्यसभा में 2018 से प्रस्तुत महत्वपूर्ण विधेयक (private bill) पर संसद चर्चा के बाद लेकिन त्वरित पारित करें, खेती की हर उपज, अनाज, दाले, सब्जियां, फल, पहाड़ी अनाज सहित दूध का भी सही दाम, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश अनुसार C2+ 50 के हिसाब से देना, MSP याने ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ पाना जरूरी है| इस संबंधी जो विधेयक( private bill) 2018 में लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्तुत किया था, उसे पारित किया जाए| (संलग्न 9 दिसंबर 2021 में संयुक्त किसान मोर्चा के 13 महीना चले आंदोलन के साथ 10 बार चर्चा होकर जो लिखित आश्वासन पत्र दिया गया था, उस पर धोखाधड़ी हुई तो अब फिर से एक बार चर्चा हो और कार्यवाही करें| खेती में सबसे अधिक योगदान देने वाले खेत मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 400/- कानूनन घोषित करें| ‘मनरेगा’ के तहत सही कार्य-नियोजन हो, जिसमें ‘सीमांत भूधारक किसानों के खेत में कार्य’ की भी शामिल किया जाए| इससे अंतर्राज्य और आंतरराज्य पलायन और प्रवासी मजदूरों पर अन्याय, अत्याचार खत्म होगा| आंतरराज्य प्रवासी मजदूर कानून खेती के लिए जरुरी और उपयुक्त बीज, खाद, मशीनरी पर GST लगाना गलत है, जो निरस्त किया जाए| ट्रैक्टर जैसी मशीनों पर MRP न्यूनतम कीमत घोषित करने उत्पादक कंपनियों और व्यापारियों पर सख्त नियम लागू किया जाए| खेती उपज को घोषित MSP हर मंडी में खरीदी पर लागू करने की जिम्मेदारी ‘कृषि उत्पन्न बाजार समिति’ पर सौपी जाकर, MSP से कम दाम में खरीददारों पर कानूनी कार्यवाही की जाए| हर 5 कि.मी. पर कृषि मंडी का निर्माण और मंडी में किसान, महिला- पुरुषों के लिए सभी सुविधाएं- निवास ,भोजन, पानी, शौचालय उपलब्ध की जाए| वन अधिकार कानून 2006 और ‘पेसा’ कानून 1996 का संपूर्ण पालन किया जाए तथा कोई भी विकास योजना उसके बिना आदिवासी और अन्य किसान क्षेत्र में थोपी ना जाए| किसी भी परियोजना पर निर्णय और अमल, तथा भूमि अधिग्रहण, 2013 के Fair Compensation,Land Acquisition & Rehabilitation Act – कानून के ही तहत किया जाए| बिजली परियोजनाओं का निजीकरण न हो, बिजली विधेयक संसद में पारित ना करें और स्मार्ट मीटर की योजना रद्द करें| फसल बीमा शासन सभी फसलों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के तहत सही लाभदायक बनाकर ही स्वैच्छिक रूप में लागू करें| बीमा योजना में से कंपनियों को हटाए| कृषि क्षेत्र में निजीकरण ख़त्म करे|अमेरिका की 47 कंपनिया और grobusiness विभाग के साथ, लोकसभा चुनावी आचार संहिता कालमे, केन्द्रीय व्यापार वाणिज्य मंत्रालय ने किये अनुबंध/निर्णय रद्द करे| भारत सरकार की तरफ से कोई मुक्त व्यापर समझौता रद्द करे| भारत को कृषि पर विश्व व्यापर संगठन (WTO) समझौते से बाहर आना चाहिए। केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय को समाप्त करके संविधानिक प्रावधान के तहत राज्य विषय होते हुए, राज्य स्तरीय सहकारिता संबंधी अधिकार सुनिश्चित करे| देश की हर नदी को बड़े बांधों के बदले, तटबंध भी न बांधते, विकेन्द्रित जल नियोजन से बचाये, ‘अविरल और निर्मल’ बहते रखे| आंतरराज्य विवाद से मुक्त, नदी घाटी के स्थानीय समुदाय, आदिवासी, किसान, मजदूर, कारीगर,मछुआरे, केवट सभी भाई बहनों के नदी पर, पानी पर प्रथम हक रहे| जल परिवहन, पर्यटन, रेत खनन, तथा औद्योगिक और सीवेज के अवशिष्ट पदार्थों से नदी प्रदूषित न होने दे|नदी में रिवर फ्रंट नही बनाये, जिससे की कई पर्यावरणीय आघात होते है| सूखा और बाढ़ के वीभत्स आघातों से बचने, ‘नदी सुरक्षा विधेयक’ (जिसका हमारा मसौदा तैयार है ) संसद में पारित करे| सूखाग्रस्त और बाढ़ग्रस्तों को नुकसान की भरपाई दी जाए तथा आंतरराज्य विवादों को जनसुनवाई के द्वारा सुलझाएं| बिना पुनर्वास नर्मदा जैसी किसी भी नदी घाटी या अन्य परियोजनाओं में प्रकृति और मेहनत पर परिवार का विस्थापन न किया जाए। प्रकृति निर्भर और मेहनतकश समुदायों की आजीविका पर’ विकास’ के तहत हमला न हो, इसलिए जल-जंगल, जमीन, खनिज स्थानीय समुदायों का हक और उनके स्थानीय इकाई गांव या बस्ती के स्तर पर ‘विकास नियोजन’ किया जाए| कॉर्पोरेट नियंत्रण समाप्त होकर शासन और समाज public-public partnership – के बीच समन्वय से अधिकाधिक कार्य हो| केंद्रीय श्रम कानून से 29 कानून रद्द करके 4 कमजोर श्रम संहिता लागू करने की हम पूर्णत: खिलाफत करते हैं| इन संहिताओं का लाभ पूंजीपति और उद्योगपतियों को मिलकर श्रमिकों का शोषण, उनके संगठनों का दमन होगा| राज्य स्तरीय क्षेत्रवार कल्याण मंडल(welfare boards) खत्म न किया जाए| हर क्षेत्र में धनिकों पर, लाभार्थियों पर टैक्स tax लगाकर श्रमिकों के हित में उस पूंजी से कार्य किया जाए| देश के सर्वोच्च 5% धनिको की संपत्ति और आय पर tax बढ़ाकर वारसाई संपत्ति पर tax बढ़ाकर उससे प्राप्त फंड से गरीबों को मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य और सस्ते मकानों को उपलब्ध किया जाए| शहरी श्रमिक ही गरीब बस्तियों में रहते हैं| उन्हें परिवार को एक मकान, आजीविका के स्रोत के क्षेत्र में निश्चित करें बिना, उनके मकानों का निष्कासन, वर्षा काल में तो बिल्कुल नहीं, किंतु अन्यथा भी न करें| हर गरीब बस्ती के गहरे सर्वेक्षण के साथ ‘आबादी’ घोषित करके उन्हें विकास – नियोजन का अधिकार ‘मोहल्ला सभा/ बस्ती सभा’ के नाते दिया जाए| 19.03.2024 के सर्वोच्च न्यायालय के खाद्य सुरक्षा अधिकार पर परित फैसले का तथा 2013 की खाद्य सुरक्षा अधिनियम का संपूर्ण पालन करते हुए हर श्रमिक परिवार को 15 किलो अनाज, दाल, तेल सहित भोजन का अधिकार सुनिश्चित किया जाए| राशन के बदले DBT याने नगद राशि का निर्णय आदेश तत्काल रद्द किया जाए|इस दोरान भगवन सेप्टा, कैलाश यादव, प्रताप भाई, मंशाराम भाई, रामकुवरबाई, राहुल यादव, कमला यादव आदि उपस्थित रहे।
