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माहेश्वरी समाज द्वारा महेश नवमी पूरे हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाई गयी.

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ललीत हौंडा बौद्धिक भारत भीनमाल

भीनमाल शहर में माहेश्वरी समाज द्वारा महेश नवमी पूरे हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाई गयी. महेश नवमी माहेश्वरी समाज के वंशोत्पत्ति दिवस के रूप में मनाई जाती है
माहेश्वरी समाज में महेश नवमी के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। सर्वप्रथम सुबह पूजा कर भगवान महेश का महाभिषेक किया गया। न्याति नोहरे से विशाल भव्य शोभायात्रा निकाली गई जो क्षेमकरी सर्किल, गायत्री माता मंदिर, खारी रोड, माघ चोक, चंडीनाथ मंदिर होते हुए पुनः समाज भवन पहुंची जहां महाआरती का आयोजन हुआ। शोभायात्रा में जगह जगह आइसक्रीम पेय पदार्थ की व्यवस्था की गई। शोभायात्रा में सभी समाज बंधुओं और बच्चों ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया दोपहर में भोजन प्रसादी का आयोजन किया गया। समाज द्वारा प्रतिभावन समारोह कार्यक्रम में बालक बालिकाओं को सम्मान देकर सम्मानित किया गया। सांय भोजन प्रसादी का आयोजन हुआ।
इसलिए मनाते हैं महेश नवमी -महेश नवमी पर खासतौर से माहेश्वरी समाज द्वारा मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार माहेश्वरी समाज के पूर्वज क्षत्रिय वंश के थे। किसी कारण से उन्हें ऋषियों ने श्राप दे दिया। तब इसी दिन भगवान शंकर ने उन्हें श्राप से मुक्त किया व अपना नाम भी दिया। यह भी प्रचलित है कि भगवान शंकर की आज्ञा से ही इस समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य या व्यापारिक कार्य को अपनाया।
ज्येष्ठ में शिव पूजा का महत्व -ज्येष्ठ महीने में भगवान शिव की पूजा का विधान ग्रंथों में बताया है। इन दिनों में भगवान शिव को खासतौर से जल चढ़ाया जाता है। मंदिरों में शिवलिंग को पानी से भरा जाता है। ज्येष्ठ महीने में भगवान शिव को गंगाजल और सामान्य जल के साथ दूध भी चढ़ाया जाता है। स्कंद और शिव पुराण के मुताबिक इस महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से महापुण्य मिलता है।

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