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नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के आयुक्त ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधि मंडल से चर्चा निराकरण का दिया भरोसा

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रामलाल सोलंकी बौद्धिक भारत बड़वानी

आयुक्त दीपक सिंह ने, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों सहित
नर्मदा बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधीयों के साथ की विस्तृत चर्चा, सुनवाई| चुनावी प्रक्रिया और आचार संहिता खत्म होते ही कल, 6 जून के रोज, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के आयुक्त मा. दीपक सिंह ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधी और कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा की| आयुक्त महोदय ने शांतिपूर्ण सुनवाई की और हर मुद्दे पर विस्थापित प्रतिनिधि को सुनते, मेधा पाटकर, राहुल यादव, मुकेश भगोरिया जैसे कार्यकर्ताओं से कानूनी आधार तथा अधिकार की बात समझ लेकर अपनी राय और कार्यवाही का आश्वासन दिया। आयुक्त महोदय के समक्ष 2023 में हजारों मकान, सामान, ध्वस्त होकर मवेशी और कुछ 6 इंसानों की मौत की हकीकत सहित उसके कारण मीमांसा प्रस्तुत की| आंदोलन ने शासन की और से बैकवॉटर लेव्हल्स बदलने की गलती मंजूर करते हुए, नुकसान की हर परिवार को संपूर्ण भरपाई तथा संपूर्ण पुनर्वास के बिना कोई संपत्ति न डूबाने का नियोजन, सरदार सरोवर का जलस्तर 122 मीटर पर रोकने की मांग की।
पुनर्वास का उर्वरित कार्य- टिनशेड में 2019 से रखे गये परिवारो की जांच और पात्रता डूब से बाहर किये 15946 परिवारों को डूबग्रस्त स्वीकार करके उर्वरित लाभ देना, खेती की जमीन डूबी हो तो पात्रता अनुसार अनुदान देना, मकान निर्माण का अनुदान, गुजरात में फंसाये गये लोगों की समस्या का निराकरण, मछुआरों के संघ का पंजीयन और जलाशय पर अधिकार; कुम्हारों, उर्वरित दुकानदारों को भूमी आबंटन, उर्वरित भूखंडो का बटवारा, आबंटित भूखंडों की रजिस्ट्री, पुनर्वास स्थलों का विस्तारीकरण आदि तमाम मुद्दों की हकीकत बयां की गयी| हर तहसील में रिक्त पुनर्वास अधिकारी के पदभर्ती तथा सर्वोच्च अदालत के आदेशअनुसार शिकायत निवारण प्राधिकरण में कुल पांच सदस्यों की नियुक्ती की मांग रखी गयी| पहाड़ी आदिवासी तथा निमाड़ के सभी परिवारों की पुनर्वास की प्रक्रिया और पुनर्वसाहटो पर सभी सुविधाओं की निर्माण और निश्चिती होने तक सरदार सरोवर का जलस्तर 122 मीटर पर रखने की कानूनी मांग पर आंदोलन ने त्वरित जवाब चाहा है| आयुक्त महोदय ने सभी अधिकारियों की उपस्थिति में विस्थापितों को न्याय दिलाने के प्रति आश्वसित किया| आंदोलन की ओर से आने वाले मानसून 2024 में बिना पुनर्वास डूब को नामंजूर करते हुए, निर्णय न हो तो संघर्ष को ही आधार घोषित किया।

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