अनिल कुमार निगवाल बौद्धिक भारत निवाली
निवाली में नवीन आचार्य विकास वर्ग एवं आचार्य विषय सह अभ्यास वर्ग के द्वितीय दिवस के संवाद सत्र मैं प्रज्ञा शिक्षा विकास परिषद के व्यवस्थापक आदरणीय कन्हैया जी सिसोदिया, सह सचिव श्री महेंद्र जी गोयल, एवं वर्ग संयोजक श्री सुनील जी दशोरे मनचस्व थे अतिथि परिचय श्री देवेंद्र जी सोनवणे प्राचार्य शिशु मंदिर पानसेमल ने किया वह संचलन सु श्री अचला पालीवाल आचार्य बमनाला ने किया अमृत वचन एवं गीत के पश्चात वर्ग संयोजक श्री सुनील जी दशोरे द्वारा अपने उद्बोधन में प्रार्थना वंदना का महत्व बताया गया जिसमें आपने बताया कि माता सरस्वती का पूर्ण निष्ठा से पूजन एवं ध्यान करने पर ही ज्ञान प्राप्त हो सकता है वंदना और प्रार्थना में अंतर बताते हुए आपने बताया कि वंदना में हम मां सरस्वती के स्वरूप एवं गुणो का वर्णन करते हैं, तो वहीं प्रार्थना में हम माता सरस्वती से बुद्धि,साहस, सील ज्ञान का वर मांगने हैइसलिए हमें भैया बहनों को सीखना चाहिए की ज्ञान प्राप्ति हेतु हमें पूर्ण निष्ठा से माता सरस्वती की पूजन अर्चना कर रोज प्रार्थना करनी चाहिए इस उपलक्ष में खरगोन विभाग के विभाग समन्वयक महादेव जी यादव, एवं स्थानीय समिति के कोषा अध्यक्ष मनोहर जी कुमावत, सदस्य त्रिलोक चंद जी सोनी, एवं पंकज जी बंसल सहित नवीन आचार्य विकास वर्ग शिक्षार्थी वासचालन टोली उपस्थित थी l
