भाण्डवपुर तीर्थ में ऐतिहासिक भव्यातिभव्य प्रतिष्ठा सम्पन्न महातीर्थ में आस्था, श्रद्धा एवं समर्पण का समन्दर लहराया
ललीत होंडा बौद्धिक भारत भीनमाल
भीनमाल – भाण्डवपुर महातीर्थ में तत्त्वत्रयी प्रतिष्ठोत्सव के आयोजन में सोमवार को भव्य प्रतिष्ठोत्सव सम्पन्न हुआ । मिडिया प्रभारी कुलदीप प्रियदर्शी ने बताया कि महोत्सव के पन्द्रहवें दिन भगवान भास्कर की प्रथम किरणों के साथ ही महावीर 52 जिनालय, वर्धमान-राजेन्द्र जैनागम मन्दिर, शाश्वत जिन चैत्य, गणधर-पूर्वाचार्य मन्दिर, राजेन्द्रसूरि मन्दिर, पुण्य-सम्राट जयन्तसेनसूरि समाधि मन्दिर, शान्तिविजय समाधि मन्दिर आदि 105 बिम्बों की प्रतिष्ठा निमित्त तीर्थ परिसर में गुरुभक्तों का अथाह समन्दर लहराने लगा । तीर्थ परिसर में प्रतिष्ठा निमित्त शुभ मुहूर्त्त में प्रभु एवं गुरु प्रतिष्ठा के साथ शिखर पर ध्वजा, दण्ड, कलश स्थापन आदि के लाभार्थियों ने अपने परिवार के साथ विधि विधान से कार्य किया । गच्छाधिपति नित्यसेनसूरि एवं आचार्य जयरत्नसूरि महाराज की निश्रा में अन्तर्राष्ट्रीय विधिकारक सत्यविजय हरण के मन्त्रोच्चार के साथ प्रतिष्ठा की विधि कराई गई । जैसे ही प्रतिष्ठा की शुभघड़ी आई तो डंका बजते ही सभी लाभार्थियों ने यथास्थान एक साथ प्रतिष्ठा सम्पन्न की तो तीर्थ परिसर में हजारों गुरुभक्तों ने वीर प्रभु एवं गुरुओं का जयघोष करते हुए वातावरण को गुँजायमान करते हुए ढोल की थाप पर नृत्य करने लगे । विभिन्न नृत्य मण्डलियाँ सभी को आकर्षित कर रही थी तो पंजाब बैण्ड सुमधुर लहरियों के साथ अपने करतब भी दिखा रहा था । तीर्थ का दृश्य अलोकिक और अवर्णनीय हो गया ।

भव्य प्रतिष्ठा के पश्चात् क्षत्रियकुण्ड नगरी में धर्मसभा का आयोजन हुआ । गच्छाधिपति नित्यसेनसूरि महाराज ने मंगलाचरण करते हुए कहा कि समाज के लोगों में संगठन नहीं होगा तब तक आप सफल नहीं हो पाएँगे । हम दोनों पट्टधरद्वय मिलकर ही सब कार्य करेंगे । आज भाण्डवपुर की स्मृति भारत ही नहीं देश-विदेश में भी इसकी गौरवगाथा कह रही है । हम दोनों का नाम था परन्तु पुण्य-सम्राट के पायलट, कार्यदक्ष मुनिराज आनन्दविजय ने पूरी प्रतिष्ठा में अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए सभी कार्य सम्पन्न किए जिससे यह प्रतिष्ठा सानन्द सम्पन्न हुई इसकी हमें प्रसन्नता है । खरतरगच्छीय आचार्य मनोज्ञसागर महाराज ने कहा कि मैं जयरत्नसूरि के अतुल प्रेम और अतुल आत्मीयता के कारण इस प्रतिष्ठा में आने का योग बना । आपकी कड़ी मेहनत एवं पुरुषार्थ के कारण ही इस तीर्थ की जाहोजलाली देखकर मेरा मन गद्गद् हो गया । प्रतिष्ठा की जाहोजलाली देखकर मैं एवं आचार्य जिनमणिप्रभसागर के साथ समस्त खरतरगच्छ की ओर से द्वय आचार्यों को बधाई देता हूँ । इस तीर्थ का जो दिव्ख एवं भव्य रूप बना है उसमें आचार्यश्री की संयम साधना एवं शान्तिविजय द्वारा बोए बीज को सिंचित कर इस तीर्थ को भव्य रूप प्रदान किया वह जयरत्नसूरि के पुरुषार्थ का ही कमाल है | भाण्डवपुर तीर्थोद्धारक आचार्य जयरत्नसूरि महाराज ने कहा कि आप सभी के पुण्य से यह कार्य निर्विघ्न हुआ है मुझे यश देना नहीं है । मेरी अब यही भावना है कि त्रिस्तुतिक संघ समुदाय के प्रत्येक साधु-साध्वी को पढ़ा कर योग्य बनावें । मेरी एक आँख में पुण्य-सम्राट एवं दूसरी में योगिराज हैं और उनके सहयोग से ही यह कार्य सफल हुआ तो मेरा जीवन धन्य हो गया । त्रिस्तुतिक गच्छ के सभी आचार्य हम दोनों के कार्यों में साथ हैं । सौधर्मबृहत्तपोगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वाघजीभाई वोहरा ने पट्टधरद्वय को भाण्डवपुर चातुर्मास करने की विनन्ती सकल संघ की ओर से करते हुए कहा कि जैन जगत के इतिहास में भाण्डवपुर महातीर्थ का एक स्वर्णिम पृष्ठ आज अंकित हुआ है । हमें जो असम्भव कार्य दिख रहा था वह कार्य आचार्य ने सम्भव कर दिखाया । हमारा सौभाग्य है कि जयरत्नसूरि दीर्घदृष्टि वाले गुरु की छत्रछाया हम सबके ऊपर है क्योंकि जंगल में मंगल करने का कार्य ऐसे ही गुरु कर सकते हैं । यह प्रतिष्ठा अकथनीय और अकल्पनीय हुई है । प्रतिष्ठोत्सव में आज नाहर चेरिटेबल ट्रस्ट के सुखराज नाहर, मूलचन्द छाजेड़, नाकोड़ा जैन तीर्थ के अध्यक्ष रमेश मुथा, आदिनाथ-राजेन्द्र जैन ट्रस्ट-मोहनखेड़ा के ट्रस्टी पृथ्वीराज कोठारी, सुजानमल सेठ, नवकार 68 जिनालय के ट्रस्टी बाबूलाल, भरतपुर तीर्थ के ट्रस्टी, बसन्तीदेवी किशोरमल खिमावत, पवनीदेवी लुंकड़-72 जिनालय भीनमाल, मूलचन्द चौधरी, सिद्धार्थ काश्यप, जीवदया प्रेमी पोलीकेब इण्डिया लिमिटेड के सीएमडी इन्द्रभाई जयसिंघानी, उद्योगपति अशोक बागला, रणजीत लड्ढा आदि अनेक गणमान्य पधारे ।
दो मुमुक्षुओं की दीक्षा 3 मई को – गच्छाधिपति ने मुमुक्षु यक्षा संजयभाई बल्लू-थराद-सूरत एवं मुमुक्षु भरतभाई शेठ-थराद-अहमदाबाद को दीक्षा का मुहूर्त्त प्रदान किया । दोनों मुमुक्षु की दीक्षा 3 मई को शंखेश्वर महातीर्थ में होगी । महावीर जैन श्वेताम्बर पेढ़ी (ट्रस्ट), श्री वर्धमान-राजेन्द्र जैन भाग्योदय ट्रस्ट (संघ), तत्त्वत्रयी प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के द्वारा सम्पादित प्रतिष्ठोत्सव में अनेक प्रशासननिक, सामाजिक गणमान्य पदाधिकारियों का भी आगमन हुआ । प्रतिष्ठा के अन्तिम दिन शाही करबा विजुदेवी भँवरलाल बालगोता-मेंगलवा की ओर से एवं फले चुन्दड़ी संघवी कुन्दनमल गाडुराम बालगोता-मेंगलवा की ओर से की गई । दोपहर में शान्तिस्नात्र महापूजन संघवी सीतादेवी माँगीलाल रिखबचन्द कबदी-सायला की ओर पढ़ाई गई । आयोजन में लाभार्थी परिवार की ओर से प्रभावना हस्तीमल भबुतमल पालगोता-चौहान-सुराणा की ओर से, परमात्मा एवं गुरु प्रतिमाओं की नयनाभिराम अंगरचना सागरमल पीरचन्द बाफना-पाँथेड़ की ओर से एवं प्रभु भक्ति एवं रोशनी रमेशकुमार दरगचन्द विसाणी-पोषाणा की ओर से हुई । प्रतिष्ठोत्सव में एक्मे आईटी सोलेशन जोधपुर द्वारा इन्टरनेशनल मेनेजमेंन्ट किया गया ।