गौमाता सेवा समिति सांचौर के तत्वाधान में नेहड़ क्षेत्र में चल रहे अमृत-जल अभियान का गौमाता समिति के सदस्यों द्वारा भौतिक सत्यापन किया गया।
प्रवीण जोशी बौद्धिक भारत सांचोर
गौमाता सेवा समिति सांचौर के तत्वाधान में नेहड़ क्षेत्र में चल रहे अमृत-जल अभियान का गौमाता समिति के सदस्यों द्वारा भौतिक सत्यापन किया गया। जिसमें दुर्गम क्षेत्र के सबसे अंतिम सीमावर्ती गाँवो एवम रणखार क्षेत्र में गौमाता सेवा समिति द्वारा चलाये जा रहे जल सेवा अभियान के तहत पानी के अवाडो का निर्माण करवा कर रोजाना पानी के टेंकरो द्वारा पानी सप्लाई किया जा रहा है। इन स्थाई सेवा केंद्रों पर दानदाता, भामाशाहो में 1. धुड़ाजी की ढाणी, जोरादर, 2. काला की ढाणी, रिडका, 3.राजा की ढाणी, रणखार, आकोड़िया, 4. आंसूजी सुथार की ढाणी, खेजड़ियाली, 5. तिजारियो की ढाणी, दसूरिया, 6. नागड़ो की ढाणी, खेजड़ियाली, 7. कोलियों की ढाणी, सुराचन्द, 8. कानजी की ढाणी, सुराचन्द, 9. पिपराला, सुराचन्द, 10. सुराचन्द गाँव के सहयोग से रोजाना 20 टैंकर पानी सप्लाई एवम हरा-चारा भिजवाया जा रहा है। तथा अन्य नेहड़ के दुर्गम स्थल पर निराश्रित घुमन्तु गोवंश के लिये चलत टेंकरो द्वारा पानी की सप्लाई की जाती है।

गोमाता सेवा समिति के सदस्य गनपतजी पतंजलि ने बताया कि पूज्य दत्तशरणानंद जी महाराज की प्रेरणा से निराश्रित गोवंश के गत वर्ष भीष्ण गर्मी के 2 महीनों के दौरान 1200 टेंकर जल सेवा एवम 30 गाड़ी हरे चारे की सेवा प्रदान की थी। तथा आवश्यकता वाले स्थानों पर दानदाताओ के सहयोग से पानी के अवाडो का निर्माण किया गया था। इस वर्ष कुछ नये स्थान चिन्हित कर गौसेवा प्रकल्प चलाये जा रहे है। गौमाता सेवा समिति के सक्रिय कार्यकर्ता एवम नेहड़ क्षेत्र के अनुभवी रमेश राजपुरोहित खेजड़ियाली ने बताया कि रणखार क्षेत्र में मई-जून के महीनों में तेज गर्मी और लू के साथ रेत की आंधिया चलती है उस दौरान गाय पानी की तलाश में इधर-उधर भटकती हुई प्यास के मारे अपने प्राण गंवा देती है। रणखार में लुणी नदी के बहाव वाले क्षेत्र के गड्डो में क्षारीय खारे पानी को पीकर गौमाता तड़प-तड़प कर मर जाती है। सर्वे के दौरान क्षेत्र में गौमाता कई कंकाल पड़े मिले। उक्त स्थिति को फोटोग्राफर दीपक जीवनानी ने अपने कैमरे में कैद की है। कल निर्जला एकादशी के अवसर पर गौमाता सेवा समिति के सदस्य एवम भामाशाह जयकिशन विशनोई सरवाना, श्रवनदास वैष्णव, गनपत दवे, रमेश पुरोहित खेजड़ियाली ने नेहड़ क्षेत्र का दौरा कर अमृत-जल अभियान को और प्रभावी ढंग से चलाने की योजना बनाई।