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मंदिरों में वीआईपी दर्शन पद्धति ख़त्म करने की मांग

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रमेश सुथार बौद्धिक भारत सिरोही

देश के प्रमुख मंदिरों में वीआईपी दर्शन पद्धति से देश की छवि देश तथा विदेशी दर्शनार्थियों में धूमिल हो रही है। मंदिरों में गरीब अमीर का भेद श्रद्धालुओं की आत्मा को तार-तार कर रहा है। मंदिरों में वीआईपी दर्शन के नाम पर लूटने वाले मंदिरों की महत्ता व सनातन संस्कृति को भारी नुक़सान कर रहे है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके विषय में संज्ञान लेकर भारत के मंदिरों में दर्शन व्यवस्था का वीआईपी कल्चर खत्म करने की मांग की। सामाजिक चिंतक गोपाल सिंह राव पोसालिया के अनुसार देश बड़े मंदिरों में वीआईपी दर्शन, पूजा, प्रसाद आदि के नाम पर भारी लूट खसोट हो रही है। देश के बड़े मंदिरों में दर्शन कर अनुभव किया है कि मंदिरों में गरीब – अमीर,पद, पैसा, पहचान, प्रतिष्ठा, पहुंच के आधार पर बडा़ भेदभाव हो रहा है। मंदिरों में दर्शन करने आने वाले देशवासियों व विदेशियों को यह भेदभावपूर्ण व्यवहार न्याय संगत नहीं लगता है।

यह वीआईपी दर्शन पद्धति उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही है। मंदिरों के दर्शनार्थियों को कुछ लोगों ने लूटने का धंधा बना दिया है। वीआईपी दर्शन करवाने, पूजा करवाने, प्रसाद की व्यवस्था करने के नाम पर मंदिरों में लाखों करोड़ों की लूट-खसोट हो रही है। ईमानदार गरीब, महिला, दिव्यांग ,वृद्ध मंदिरों की लाइन में दर्शन के लिए घंटों खड़े रहकर नम्बर आने का इंतजार करते है। भ्रष्ट , झूठे, मक्कार,चोर व्यक्ति पैसे के दम पर मंदिर जैसी पवित्र जगहों पर भी वीआईपी बनकर अपना रूतबा दिखा देते है। भगवान के दरबार में गरीब अमीर, ऊंच-नीच, पहचान, प्रतिष्ठा, प्रतिभा,पद, पैसे के आधार पर भेदभावपूर्ण व्यवहार होना नैतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक भावनाओं के विरुद्ध है। देश के धार्मिक आध्यात्मिक पूजा, इबादत के स्थलों में मंदिरों को छोड़कर कहीं भी वीआईपी कल्चर पद्धति के नाम पर लूट नहीं होती है। देश के गुरूद्वारे, मस्जिद, गिरजाघर में किसी भी प्रकार का वीआईपी कल्चर नहीं होता है। जिसके कारण वहां किसी भी प्रकार का भेदभाव व लूट भी नहीं होती है। वीआईपी दर्शन पद्धति को देश के संत, महात्माओं व आदी गुरु शंकराचार्य जी ने भी ग़लत बताया है। आश्रम श्री हित राधा केली कुंज वृंदावन के भारतीय हिन्दू आध्यामिक गुरु, संत और दार्शनिक प्रेमानंद महाराज के अनुसार अगर रुपए के बल से किसी का आदर हो रहा है तो वह आदर नहीं सिर्फ माया ही है ।वहां ना भगवान है और ना भगवान का भक्त है ।साथ ही वह लोग दर्शन का सुख भी नहीं प्राप्त कर पाते हैं। एक आदमी जो लाइन में खड़ा धक्का खा रहा है और धक्का खाते हुए जब वह भगवान के आगे पहुंचा तो वह व्यक्ति आंसू भरकर भगवान की तरफ देख रहा है तो वह भगवान के दर्शन पा रहा है। जहां रुपए का महत्व है वहां ठाकुर दर्शन नहीं होते हैं और ना अध्यात्म सुनकर बदलाव होता है। जहां रुपए की महिमा है,वहां भगवान के भक्ति की महिमा नहीं होती। भगवती माया का सिक्का हर जगह हैं,जहां बात ना बनती हो वहां गड्डी निकालो । लेकिन एक जगह पैसों से बात नहीं बनेगी और वह जगह है ठाकुर जी और ठाकुर जी के प्रेमी जनों के पास। अगर तुम्हारा रुपए के बल से हर काम बन रहा है तो वह सिर्फ मायाजनित काम ही बनेगा ।

माया का महत्व और भक्ति का महत्व बिल्कुल अलग होता है जो यह महत्व समझ लेता है उन पर ठाकुर जी अपनी कृपा भी बरसते हैं । शंकराचार्य जी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार कुछ लोग धर्म के नाम पर डोंग व पाखंड कर रहे हैं जो कि गलत है ।इसे बंद किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं बड़े बड़े मंदिरों में वीआईपी दर्शन पर किया जा रहा व्यापार भी बंद होना चाहिए। शंकराचार्य जी ने कहा कि बड़े-बड़े मंदिरों में विकास कार्य कराया जा रहा है। विकास कार्य के बाद जितना पैसा लगा है उसे निकालना भी तो पड़ता है,यह व्यापार का नियम है।इसके लिए टिकट लगाए जाएंगे, वीआईपी दर्शन कराए जाएंगे यह सब हो रहा है, तो धर्म संस्थाओं के लिए ठीक नहीं है।राव ने बताया कि चारधाम यात्रा में भारी भीड़ के कारण समय-समय पर वीआईपी दर्शन पर सरकार द्वारा रोक लगाई जाती है।वैसी ही रोक भारत के सभी प्रमुख मंदिरों में हमेशा के लिए लगाने की आवश्यकता है।यह व्यवस्था मोदी है तो मुमकिन है।देश के प्रमुख मंदिर यथा चार धाम,बारह ज्योतिर्लिंग ,बावन शक्तिपीठ में भारत में स्थित 42 शक्तिपीठ, पांच प्रमुख विष्णु मंदिर बद्रीनाथ,तिरुपति बालाजी, जगन्नाथ पुरी, विष्णुपद मंदिर, भगवान विट्ठल मंदिर सहित सभी बड़े मंदिरों में जहां लाखों करोड़ों लोगों दर्शन करने जाते है । वहां वीआईपी दर्शन पद्धति बंद करने की सख्त आवश्यकता है।राव ने सभी समस्याओं पर गौर करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए कानून बनाकर मंदिरों में अनैतिक व्यापार, लूट-खसोट कर बदनाम करने वालों पर सख्ती बरतने की मांग की।

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