रामलाल सोलंकी बौद्धिक भारत बड़वानी
नेत्र सहायक का काम सिर्फ अपने पेशे तक ही सीमित नहीं होता है। बल्कि अपने अनुभव व ज्ञान के बदौलत अशिक्षा व अज्ञानता के अंधेरे को दीपक की तरह जलाकर दूसरों की जिंदगी में उजाला भी प्रदान करते हैं। ऐसी ही मिसाल शहर के जिला अस्पताल के नेत्र सहायक श्री अनिल राठौर ने अपने पिता के नेत्रदान करवाते हुए पेश की है। आदिवासी बाहुल्य बड़वानी जिले में नेत्रदान के प्रति जागरूकता का ही असर है कि अब लोग खुद आगे आने लगे हैं। शुक्रवार को एमजी रोड निवासी 87 वर्षीय श्री बाबूलाल राठौड़ का निधन हो गया। नेत्र सहायक बेटे अनिल राठौड़ ने भाई मुकेश राठौड़ व मां कमलाबाई राठौड़ से चर्चा कर पिता के नेत्रदान की इच्छा जताई। परिवार से सहमति मिलने के बाद लायंस क्लब बड़वानी सिटी के नेत्रदान को-ऑर्डिनेटर राम जाट से संपर्क किया। जो कीट की व्यवस्था कर नेत्र सहायक प्रदीप चौकड़े को साथ लेकर राठौड़ के निवास पहुंचे। परिजनों से सहमति पत्र भरवाकर कार्निया को सॉल्यूशन में प्रिजर्व कर इंदौर एमके इंटरनेशनल आई बैंक भिजवाया। लायंस क्लब के महेश शर्मा ने बताया कि अनिल स्वयं जिला अस्पताल बड़वानी में नेत्र सहायक है। जो नेत्रदान के महत्व को समझते हैं। इसलिए उन्होंने अपने पिताजी के नेत्रदान करवाकर अंधकारमय जिंदगियों को रोशनी देने का कार्य किया है। अध्यक्ष सचिन शर्मा ने बताया कि लायंस क्लब बड़वानी सिटी ने विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से अब तक 477 नेत्रदान करवा चुके हैं। बड़वानी के साथ धार, आलीराजपुर, खरगोन आदि जिलों में भी समय सीमा में पहुंचकर नेत्रदान कराए गए हैं। दो बार महाराष्ट्र में जाकर भी नेत्रदान करवाए।

