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विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने पर विराट हिन्दू शक्ति संगम का आयोजन

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गणपत दवे बौद्धिक भारत सांचौर

विश्व हिन्दू परिषद के 60 वर्ष पूरे होने पर षष्ठी पूर्ति कार्यक्रम के तहत गोलासन में विराट शक्ति संगम कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद् डॉ.उदाराम वैष्णव ने की। मुख्य वक्ता के तौर पर विश्व हिन्दू परिषद प्रांत समरसता प्रमुख सागरमल सोनी मौजूद रहे। सभा को संबोधित करते हुए सतीश सिंह बोरली ने कहा कि दुनियाभर के हिंदुओं को संगठित करने और उनके लिए कार्य करने के लिए 29 अगस्त 1964 को विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना मुंबई में संतों की मौजूदगी में हुई थी। संतों के आशीर्वाद से विहिप ने राम जन्मभूमि आंदोलन में हिस्सा लिया। कई कार्यकर्ताओं के त्याग, तप, बलिदान व लम्बे संघर्ष के पश्चात आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर बना है। उन्होंने कहा कि संगठित हिन्दू समर्थ राष्ट्र है, जिस दिन हिन्दू संगठित हो जाएगा, उस दिन देश की अनेक समस्याओं का स्वतः समाधान हो जाएगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. उदाराम वैष्णव ने कहा कि हमारा लक्ष्य है भारत पहले से भी श्रेष्ठ भारत बने। आज विहिप की वजह से देश में धर्मांतरण पर अंकुश लग रहा है। संत मोहन जी महाराज ने कहा कि अब हिंदुओं को एक जुट होकर अपने धर्म की रक्षा करनी होगी। हाल ही में जो घटनाएं हिंदुओं के साथ घटित हुई है, इसकी पुनरावृत्ति नहीं हो पाए, इसके लिए सभी को एकजुटता दिखानी होगी ।मुख्य वक्ता सागरमल सोनी ने कहा कि इस देश में जाति व्यवस्था कभी भी नहीं थी। देश में कार्य के अनुसार चार वर्ण थे, इन चारों वर्णों से मिलकर ही सनातन संस्कृति बनती थी। जिसमें सभी का आपस में अहम योगदान था। सब एक दुसरे को पूरक थे। कोई किसी का प्रतिस्पर्धी नहीं था। देश की एकता अखंडता के लिए आदि शंकरचार्य में चार मठों की स्थापना की थी। चारों मठों पर अलग अलग वेद के अध्ययन की व्यवस्था थी किसी एक स्थान पर चारों वेदों का अध्ययन अध्यापन नहीं होता था। जिसको चारों वेद पढ़ने होते थे वो इन चारों मठों पर जाते थे। इससे सबको देश की विविध संस्कृतियों को ज्ञान होता। सब एक दूसरे से ज्ञान का आदान प्रदान करते संवाद करते। इसी से देश की एकता और अखंडता बनी थी। सब आपस में मिलकर रहते एक दूसरे के बारे में जानते। कालांतर में आई जाती व्यवस्था ने देश को तोड़ने का काम किया।कार्यक्रम का संचालन करते हुए नानजी सिंह कांटोल ने कहा कि विहिप 60 वर्ष का हो गया है। यह दुनिया का एकमात्र संगठन है जो हिन्दू समाज की चिंता करते हुए किसी भी प्रकार से हिन्दू पर हमले अत्याचार हो तो सबसे पहले रक्षा कवच बन खड़ा होता है। देश को लव जिहाद के लिए जागरूक कर बेटियों को बचाना हो या छूआछूत मुक्त समरसता युक्त समाज की स्थापना हो। विहिप इनको लेकर सतत प्रयास करता आया है। राम मंदिर के बाद अब राष्ट्र का नव निर्माण हो रहा है लेकिन बिना भेदभाव व छूआछूत को जड़मूल से नष्ट किए बिना सम्भव नहीं है। विष्णुदास वैष्णव ने बताया कि बांग्लादेश में हुए अत्याचार व वीभत्स घटनाएं हमें आगाह कर रही हैं कि सबको एकजुट होना होगा। देश में कई राज्यों में हिंदुओं पर हो रहे लगातार हमले से सीख लेकर जातिवाद के कीड़े को मार कर एकता के साथ रहना होगा।जिला मंत्री बलवंत कुमार प्रजापत ने विहिप का परिचय व उपलब्धियां पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में वक्ताओं ने विहिप की उपलब्धियां व आगे के कार्यों को भी बताया। इस दौरान संत भरत नाथ जी कमालपुरा, संत मोहन जी महाराज मुनि आश्रम सांचौर, संत रतन पूरी जी महाराज गोलासन, संत पूनमा राम जी महाराज सरवाना, संत बलदेव नाथजी सांचौर, संत रूपाभारती जी महाराज गोलासन, संत पूनम पूरी जी गोलासन, सतीश सिंह बोरली, डॉक्टर उदाराम वैष्णव, सगरमल सोनी, बलवंत कुमार प्रजापत, पुखराज पुरोहित, नानजी सिंह कांटोल, विष्णुदास, भलाराम सुधार, देवराज चौधरी, कर्ण सिंह राव, चंपत राज टाक, त्रिलोक रावल, अर्जुन कुमार, गोलासन सरपंच जीवाराम, अर्जुन सिंह सरवाना, धूड़ा भाई ठक्कर, जितेंद्र गुप्ता, पुखराज प्रजापत, धनाराम माली, शंभू सिंह राव, मसरा राम अगार, ईश्वर सिंह राव, विठ्ठल दास, पारस प्रजापत सहित सेकडो सनातन धर्म प्रेमी उपस्थित रहे।

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