गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने नंदगांव में गोदर्शन परिक्रमा कर किया गोपूजन
गोमाता के बीच अद्भुत और रमणीक स्थान पर आकर जीवन धन्य हो गया : कुमावत
गणपत दवे बौद्धिक भारत सांचौर
रेवदर। नंदगांव में परम श्रद्धेय गोऋषि स्वामी श्री दत्तशरणानन्दजी महाराज की पावन निश्रा में चल रहे श्री गोकरुणा चातुर्मास आराधना महोत्सव के तहत राज्य सरकार के गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत और रेवदर के पूर्व विधायक जगसीराम कोली आज नंदगांव पहुंचे जहां उनका गोशाला पहुंचने पर संस्था पदाधिकारियों द्वारा स्वागत किया गया। कैबिनेट मंत्री कुमावत ने नंदगांव गोदर्शन परिक्रमा कर श्रीपतिधाम के महाराज गोविंद वल्लभ जी के सानिध्य में गोपूजन किया। इसके बाद गोशाला के समन्वय कार्यालय में आंध्रप्रदेश के ओंगोल से पधारी पुंगनुर नस्ल की वेदलक्षणा गोमाता के दर्शन कर अभिभूत हुए। नंदगांव के धनवंतरी में बीमार गोवंश की सेवाओं को देखकर मंत्री जोराराम कुमावत ने प्रदेशभर के गोभक्तों को नंदगांव में बीमार गोवंशो की सेवा से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि ऐसे रमणीक और अद्भुत गोशाला में आकर जीवन धन्य हो गया है। पथमेड़ा महाराज जी के गोसेवा के इस अभियान में अपने पूर्ण समर्पण भाव से कार्य करता रहूंगा। गोधाम पथमेड़ा से प्रेरणा लेकर हर किसी को इस पावन अभियान से जुड़ना चाहिए। इस अवसर पर वरिष्ठ गोभक्त रघुनाथ सिंह राजपुरोहित, महामंत्री अर्जुनसिंह तिवरी, सीईओ आलोक सिंहल, मैनेजिंग ट्रस्टी ब्रह्मदत्त पुरोहित, केसाराम सुथार, मेघराज मोदी, बिहारीलाल पुरोहित, चंपालाल राजपुरोहित, साधक धर्मशरण सहित हजारों गोभक्त मौजूद रहे।
कैबिनेट मंत्री सहित भाजपाइयों ने किए संतों के दर्शन – नंदगांव में गोऋषि स्वामी श्री दत्तशरणानन्दजी महाराज के सानिध्य में आयोजित श्री गोकरूणा चातुर्मास आराधना महोत्सव में चातुर्मास के लिए देशभर से पधारे मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज, सुरजकुंड के पूज्य अवधेश चैतन्य जी महाराज, पूज्य महंत चेतनानंदजी महाराज डण्डाली, थानापति रविन्द्रानंद सरस्वती जी महाराज, गोवत्स विठ्ठल कृष्ण महाराज, 121 दंडी स्वामी सहित भारतवर्ष के सैकड़ों त्यागी तपस्वी ऋषि मुनियों के दर्शन कर गोसेवा और सनातन धर्म को लेकर चर्चा की।
इस युग में भी चारों आश्रमों के दर्शन हो, ऐसा गोमाता की कृपा से ही संभव है: मलूक पीठाधीश्वर – आज वेदलक्षणा गोमहिमा श्री भरत चरित्र कथा में मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान कृपा करके कोई ऐसा अवसर प्रदान करें। इस युग में भी चारों आश्रमों के आदर्श स्वरूप का दर्शन हो। यह केवल गौ माता की कृपा से ही संभव हो सकता है। गोवंश को केंद्र में रखते हुए गुरुकुल में ब्रह्मचर्य आश्रम, वैदिक गृहस्थ आश्रम, वानप्रस्थ व सन्यास आश्रम के एक साथ दर्शन हो। मनुष्य के आकार में दिखने वाले सभी लोग मनुष्य नहीं होते है। मनुष्य वही होते हैं जिनके जीवन में धर्म की प्रतिष्ठा होती है।


