कश्‍मीर की तरह जूनागढ़ की ‘आजादी’ के दूत बनें इमरान खान, ISI के पिट्ठू नवाब ने उगला जहर

इस्‍लामाबाद
पंजाब और कश्‍मीर में अलगाववाद को भड़काने में मुंह की खाने के बाद अब पाकिस्‍तान की बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई ने गुजरात के जूनागढ़ का राग छेड़ा है। आईएसआई के पिट्ठू और जूनागढ़ के कथित नवाब मोहम्‍मद जहांगीर खांजी ने पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से अपील की है कि वह कश्‍मीर की तरह से जूनागढ़ के भी ‘दूत’ बनें। नवाब ने कहा कि इमरान खान सभी अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर भारत के कब्‍जे से जूनागढ़ की कथित आजादी का मुद्दा उठाएं।

रेडियो पाकिस्‍तान की रिपोर्ट के मुताबिक नवाब मोहम्‍मद जहांगीर ने एक बयान जारी करके कहा है कि भारत और पाकिस्‍तान को इस मुद्दे पर चर्चा करनी चाहिए और बातचीत के जरिए इसका हल निकालना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि पाकिस्‍तान सरकार को जूनागढ़ के मुद्दे को उतनी ही सक्रियता से उठाना चाहिए जितना कि वह कश्‍मीर को उठा रही है। साथ ही इसके हल के लिए काम करना चाहिए।

पाकिस्तान ने जूनागढ़ को नक्शे में अपना दिखाया
नवाब ने कहा कि ‘जूनागढ़ पाकिस्‍तान है’, यह जूनागढ़ राज्‍य का न केवल नारा है, बल्कि सपना है जिसे हमारे पूर्वज मोहम्‍मद अली जिन्‍ना और जूनागढ़ के नवाब रहे नवाब महाबत खान ने देखा था। उन्‍होंने कहा कि अब समय आ गया है कि पाकिस्‍तान भारत के जूनागढ़ पर कथित कब्‍जे के बारे में गंभीरतापूर्वक आवाज उठाए। यह कब्‍जा अंतरराष्‍ट्रीय कानून के खिलाफ है। इससे पहले पाकिस्तान ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इसके जरिए पाकिस्तान ने कोशिश की थी कि भारत के साथ जिन क्षेत्रों को लेकर उसका विवाद है, उन पर अपना दावा ठोक सके।

इस नक्‍शे में पाकिस्‍तान ने कश्मीर, सियाचिन पर खुलकर दावा किया लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि इमरान सरकार ने कश्मीर ही नहीं गुजरात के हिस्सों को भी अपना बताया है। यहां तक कि जूनागढ़ और मनवादर, जहां 1948 में जनमतसंग्रह के बाद भारत में विलय कर लिया गया था, उन तक को पाकिस्तान के नक्शे में अपना दिखाया गया है। माना जा रहा है कि समुद्र से जुड़े इन क्षेत्रों की संपदाओं पर पाकिस्तान की नजर है, इसलिए उसने ऐसा कदम उठाया है।

सर क्रीक पर खुलकर ठोका दावा
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने उस समय कहा था कि सर क्रीक में हिंदुस्तान जो दावा करता था, नक्शे में उसे खारिज कर दिया है। पाक का दावा है कि उसकी सीमा पूर्वी तट की ओर है जबकि भारत का दावा है कि यह पश्चिम की ओर है। पाकिस्तान का कहना है कि यहां भारत पाकिस्तान के सैकड़ों किलोमीटर के EEZ पर कब्जा करना चाहता है। 70 साल से सर क्रीक को लेकर विवाद जारी है। कच्छ के रण की दलदल के क्षेत्र में सर क्रीक 96 किमी चौड़ा पानी से जुड़ा मुद्दा है। पहले इसे बाण-गंगा के नाम से जाना जाता था। यह अरब सागर में खुलता है और एक तरह से गुजरात के रण को पाकिस्तान के सिंध प्रांत से अलग करता है। इसे लेकर कच्छ और सिंध के बीच समुद्री सीमा पर विवाद है।

जूनागढ़ पर इसलिए बौखलाया है पाकिस्तान
1947 में 15 अगस्त को अंग्रेजों से आजादी से ठीक पहले तक जम्मू-कश्मीर और हैदराबाद के अलावा गुजरात के जूनागढ़ ने भारत में शामिल होने का फैसला नहीं किया था। जूनागढ़ में करीब 80 फीसदी हिंदू आबादी थी और भारत सरकार की कोशिश थी कि जूनागढ़ के नवाब मोहम्मद महाबत खानजी III भारत के साथ आ जाएं लेकिन वह राजी नहीं थे। उन्होंने 15 सितंबर, 1947 को पाकिस्तान में विलय का फैसला किया। इस फैसले से जूनागढ़ की जनता भड़क गई और राज्य के कई हिस्से में नवाब के शासन के खिलाफ लोग उठ खड़े हुए। इससे नवाब अपने परिवार के साथ कराची चले गए।

इसके बाद सरदार पटेल ने पाकिस्तान से जूनागढ़ के विलय की मंजूरी को रद्द करने और जनमत संग्रह कराने को कहा। जब पाकिस्तान ने इनकार कर दिया तो सरदार पटेल ने 1 नवंबर, 1947 को जूनागढ़ में भारतीय सेना भेज दी। इसके बाद उसी साल दिसंबर में वहां जनमत संग्रह हुआ जिसमें 99 फीसदी लोगों ने भारत में रहने को चुना। बावजूद इसके अचानक पाकिस्तान अब इसे अपने नक्शे में शामिल कर दिया है।

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