सांचौर। शहर से कुछ किलोमीटर दूर गोलासन गांव में स्थित हनुमान जी मंदिर में हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया गया।श्री हनुमान सेवा समिति गोलासन के द्वारा मंदिर को भव्य साज सज्जा के साथ देदीप्यमान किया गया जिसमें विशाल भजन संध्या का आयोजन धूमधाम से किया गया जिसमें भजन गायिका सरिता खारवाल एवं गायक मोहित राठौड़ ने अपनी सुरीली आवाज से भक्तों को भजन सुनाए जिन्हें सुनकर भक्त झूम उठे एवं भक्ति में लीन हो गए ,झांकी कलाकार लकी जटाधारी दिल्ली अपनी कलाकारी से भक्तों के आकर्षण का केंद्र बने। हनुमान जी संकट को दूर करने वाले देवता हैं शास्त्रों में हनुमान जी को शिव का अवतार बताया गया है जब व्यक्ति हर तरफ से अपने आप को हारा हुआ महसूस करने लगे और जीवन में असफलताओं से उसका सामना हो तो हनुमान जी की भक्ति ही उन्हें इन परिस्थितियों से लड़ने हेतु सबल बनाती हैं।
गोलासन हनुमान जी की विशेषता
सांचौर उपखंड क्षेत्र के गोलासन ग्राम में स्थित प्राचीन विशाल हनुमानजी मंदिर उपखंड क्षेत्र ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों की जनता के आस्था का केन्द्र बना हुआ है। मंदिर में हर पूर्णिमा को मेला लगता है। मंदिर करीब 700 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। पुजारी रतनपुरी महाराज के अनुसार गोलासन में स्थित गोचर भूमि पर अत्यधिक जालों के वृक्ष होने से सुनसान था।
एक दिन ग्वाला गायों व भेड़ बकरियों का चरा रहा था, इस दौरान साधु वेश में एक महात्मा प्रकट होकर ग्वाले के सामने आए। इस दौरान महात्मा ने कहा कि गोचर भूमि में कहीं पर आवाज सुनाई दे तब शांत रहना एवं किसी भी प्रकार की आवाज नहीं करनी यह कहकर कुछ समय के बाद महात्मा लुप्त हो गए, लेकिन कुछ देर बाद गोचर भूमि में जोर से गर्जना हुई, जिसपर चर रहे पशु डरकर इधर-उधर भागने लगे। चर रहे पशुओं को भागते देख ग्वाले ने पशुओं को ठहरने के लिए आवाज लगा दी।
ग्वाले की आवाज सुनते ही गोचर भूमि में जोर से हो रही गर्जन बंद हो गई एवं गर्जना वाले स्थान पर जाकर देखा तो हनुमान जी की प्रतिमा बाहर आई हुई थी। बताया जा रहा है, कि ग्वाले द्वारा आवाज लगने की वजह से प्रतिमा पूरी जमीन से बाहर नहीं आई। जन श्रुति के अनुसार हनुमान जी स्वयं गोलासन गांव में प्रकट हुए उनकी प्रतिमा के समीप एक कुई भी जमीन से बाहर आई जहां श्रद्धालु तेल सिंदूर चढ़ाते हैं कहा जाता है कि यह कुई अत्यधिक गहरी है क्योंकि यहां चढ़ाया जाने वाला तेल सिंदूर कहां जाता है आज दिन तक इसका पता नहीं चल पाया है आज भी हर मंगलवार एवं शनिवार को श्रद्धालुओं का मेला लगा रहता है जिसमें भक्तगण अपनी मनौतियों एवं जीवन कुशलक्षेम हेतु पैदल पहुँचते है दिनभर भक्तों का आना जाना लगा रहता है
क्यों मनाते है हनुमान जयंती ?
हनुमान जयंती या जन्मोत्सव सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है इस दिन भगवान हनुमान जी का जन्म हुआ था और इस दिन भक्त भगवान हनुमान जी की धूम धाम से पूजा करते हैं। और हनुमान जी से मनवांछित फल प्राप्त करते हैं।
भक्त हनुमान जयंती वाले दिन हनुमान जी के मंदिर जाकर बहुत सी चीजें अर्पण करते हैं। जैसे कि प्रसाद फूल नारियल तिलक भभूति गंगाजल आदि। फिर मंदिर के पुजारी उस प्रसाद को और सभी चीजों को भोग लगाकर भक्तों को वापस देते हैं।
भक्त और बहुत प्रकार से भजनसुमिरन करके हनुमान जी की स्तुति कर हनुमान चालीसा का बार-बार पाठ करते है
और विभिन विभिन स्रोतों का पाठ करके हनुमान जी को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। और साथ-साथ राम नाम का भी जाप करते हैं।
कहते हैं कि इंद्र ने हनुमान जी के शरीर को वज्र के समान कठोर होने का आशीर्वाद दिया. जिस दिन हनुमान जी को दूसरा जीवन मिला, उस दिन चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि थी, इसलिए हर साल चैत्र पूर्णिमा को भी हनुमान जयंती के तौर पर मनाया जाता है. वज्र का प्रहार हनुमान जी की ठोढ़ी पर हुआ था, ठोढ़ी को हनु भी कहा जाता है
हनुमान जयंती साल में दो बार मनाने की परंपरा हनुमान जयंती साल में दो तिथियों पर मनाने की परंपरा है। पहला चैत्र महीने की पूर्णिमा तिथि पर मनाई जाती है। जबकि महर्षि वाल्मिकी रचित रामायण के अनुसार हनुमानजी का जन्म कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मंगलवार के दिन, स्वाति नक्षत्र और मेष लग्न में एक तिथि को जन्मदिवस के रूप में जबकि दूसरी तिथि को विजय अभिनन्दन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। उनकी जयंती को लेकर दो कथाएं भी प्रचलित है। ऐसी मान्यता है जब हनुमानजी माता अंजनि के पेट से पैदा हुए तभी उन्हें बहुत तेज भूख लग गई थी। तब उन्होंने सूर्य को फल समझ कर खाने के लिए दौड़े, उसी दिन राहू भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया हुआ था लेकिन हनुमान जी को देखकर सूर्यदेव ने उन्हें दूसरा राहु समझ लिया। इस दिन चैत्र माह की पूर्णिमा होने से इस तिथि को हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। दीपावली को भी मनाई जाती है हनुमान जयंती मनाई जाती है। माता सीता ने हनुमान जी की भक्ति और समर्पण को देखकर उनको अमरता का वरदान दिया। ऐसी माना जाता है कि यह दिन दीपावली का दिन था। इसलिए इस दिन को भी हनुमान जयंती के रुप में मनाया जाता है। इस दिन सिंदूर चढ़ाने से बजरंग बलि प्रसन्न होते हैं।
इस भव्य जागरण में पूर्व विधायक हीरालाल बिश्नोई ,प्रधान प्रतिनिधि हिंदू सिंह दुठवा प्रधान प्रतिनिधि हरचंद राजपुरोहित प्रताप सिह रॉव शांतिलाल जैन मांगीलाल नाबरिया भीखचंद सोनी दिनेश खत्री फरसुराम खत्री डॉ दिनेश पुरोहित धूड़वा डॉ नवनीत चौधरी अमृत पुरोहित धुडवा प्रवीण महेश्वरी भावेश सोनी ओखसिंह रॉव बोरली अर्जुन पुरोहित ,बलवंत प्रजापत ,करण सिंह रॉव सांवलाराम देवासी हजारों संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे