गुजरात के पाटण नगर में त्रिस्तुतिक मुनिराज चारित्ररत्नविजय म सा एवं मुनिराज निपुणरत्नविजय म सा आदि ठाणा 34 की पावन निश्रा में त्रिस्तुतिक जैन संघ पाटण के तत्वावधान में पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की आठ दिवसीय आराधना त्रिस्तुतिक जैन उपाश्रय में उत्साह, उमंग और श्रद्धा के साथ चल रही है ।
इस पर्व के चतुर्थ दिन धर्म सभा में पर्व के महत्व को बताते हुए मुनिराज चारित्ररत्न विजय म सा ने कहा कि जैन धर्म की त्याग प्रधान संस्कृति में पर्युषण पर्व का अपना अपूर्व एवं विशिष्ट आध्यात्मिक महत्व है। यह एक मात्र आत्मशुद्धि का प्रेरक पर्व है । इसीलिए यह पर्व ही नहीं, महापर्व है। पर्युषण पर्व जप, तप, साधना, आराधना, उपासना, अनुप्रेक्षा आदि अनेक प्रकार के अनुष्ठानों का अवसर है । पर्यूषण शुद्ध रूप से आध्यात्मिक पर्व है। इसमें आत्म-निरीक्षण, आत्म-चिंतन ही नहीं, आत्म-मंथन की प्रक्रियाएं भी निहित हैं। इसमें भौतिक साधनों के उपभोग का कोई स्थान नहीं है । भारत में अनेकों पर्व मनाए जाते हैं, जो लगभग आमोद-प्रमोद के लिए होते हैं । परंतु जैन धर्म में पर्व पर्युषण तप, त्याग और अध्यात्म साधना के लिए है। यह एक आलौकिक पर्व है, लौकिक नहीं। पर्व पर्युषण औपचारिकता नहीं अपितु जीवन जांच और साधना का मार्ग है। ‘पर्युषण’ शब्द का अर्थ है, आत्मा के समीप निवास करना। उसका अभिप्राय: है सांसारिकता से हट कर आध्यात्मिकता के साथ जुडऩा।
मुनिराज ने कहा कि अधिकतर पर्व लौकिक होते हैं, जिनमें शरीर का पोषण किया जाता है। पर्युषण पर्व लोकोत्तर पर्व है, जिसमें शरीर का नहीं, आत्मा का पोषण किया जाता है। पर्युषण पर्व आत्म-जागृति का पर्व है। मुनिराज के सानिध्य में पर्व के प्रथम तीन दिन वार्षिक एवं पर्युषण पर्व के कर्तव्य संबंधित प्रवचन हुए एवं सोमवार से कल्पसुत्र ग्रंथ के प्रवचन प्रारंभ हुए । मंगलवार को वीर प्रभु का जन्म वांचन मनाया जायेगा । पर्व को लेकर प्रतिदिन जिनालयों में परमात्मा की अंगरचना एवं अनेक धार्मिक सामाजिक कार्यक्रम के साथ जीवदया के कार्य त्रिस्तुतिक जैन संघ पाटण की ओर से किए जा रहे है ।
मीडिया प्रभारी माणकमल भंडारी ने बताया कि पाटण नगर पालिका के मुख्य अधिकारी पांचाभाई माली एवं नगर पालिका अध्यक्ष स्मीताबेन पटेल ने मुनिराज से आशीर्वाद प्राप्त कर प्रवचन श्रवण का लाभ लिया । उन्होंने तपस्या करने वाले सभी भाई बहनों को ओर जैन समाज को पर्युषण पर्व की शुभकामनाएं प्रदान की । कल्पसुत्र ग्रंथ वहोराने का भीनमाल निवासी संघवी कांतिलाल सोहनलाल परिवार मुम्बई, अष्टप्रकारी पूजन का भीनमाल निवासी सुंदरबेन टीलचंद कावेडी परिवार, ज्ञान की आरती का जापान स्थित एक गुरु भक्त परिवार, ज्ञान की पूजा एवं कल्पसुत्र ग्रंथ वांचन का पारा निवासी सागरबेन वालचंद कांकरिया परिवार इन्दौर ने लाभ