107 साल की जुड़वा बहनों ने अपने नाम किया अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड! विश्व युद्ध में छोड़ना पड़ा था अपना घर

जापान (Japan) के लोग अधिक उम्र तक जीने के लिए मशहूर हैं. इसलिए जापान के हाथ लंबी जिंदगी से जुड़े दो खास गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड (Guinness World Record) लग चुके हैं. पहला रिकॉर्ड जापान के जिरोइमॉन किमूरा (Jiroemon Kimura) के नाम था जो दुनिया के पहले ऐसे शख्स थे जिन्होंने 116 साल की जिंदगी जी थी. साल 2013 में उनका निधन हो गया था. वहीं टानाका (Tanaka) नाम की जापानी महिला इस वक्त दुनिया की सबसे बुजुर्ग इंसान है जिनकी उम्र 118 साल हो चुकी है. मगर अब जापान के हाथ सबसे ज्यादा उम्र तक जीने से जुड़ा एक और रिकॉर्ड लग गया है. इस रिकॉर्ड को हासिल किया है दो जुड़वा बहनों (Twin Sisters) ने.

उमेनो सुमियामा (बाएं) और कोइमे कोदामा (दाएं) अपने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड सर्टिफिकेट के साथ. (फोटो: guinnessworldrecords.com)

जापान की उमेनो सुमियामा (Umeno Sumiyama) और कोइमे कोदामा (Koume Kodama) दुनिया की सबसे बुजुर्ग जुड़वा बहनें (world’s oldest identical twins) बन गई हैं. इन बहनों ने अब अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया है. 1 सितंबर 2021 तक उनकी उम्र 107 साल और 300 दिन थी. उमेनो और कोइमे 5 नवंबर 1913 को जापान के शोडो आइलैंड (Shodo Island) पर पैदा हुई थीं. उनके परिवार में 13 लोग थे. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से बात करते हुए महिलाओं के परिवारवालों ने कहा कि दोनों बेहद सकारात्मक सोच की औरतें हैं और चिंता नहीं करती हैं. उमेनो ज्यादा दृढ़ इच्छाशक्ति वाली हैं जबकि कोइमे ज्यादा सौम्य हैं. बहनें बताती हैं कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों की अलग-अलग जगह शादी हुई. उमेनो ने ऐसे शख्स से शादी की जो शोडो आइलैंड पर ही रहता था जबकि कोइमे की शादी आइलैंड से बाहर एक शख्स से हुई.

दोनों विश्व युद्ध की साक्षी रही हैं बहनें. (फोटो: guinnessworldrecords.com)

बहनों ने बताया कि उन्होंने विश्व युद्ध (World War) को काफी नजदीक से देखा है. अपने अनुभव के बारे में बताते हुए उमेनो ने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा था क्योंकि वहां हवाई हमलों से बचने के लिए शेल्टर बना दिए गए थे. मगर फिर धीरे-धीरे युद्ध खत्म हो गया. एक वक्त ऐसा आया कि जुड़वा बहनें एक दूसरे से करीब 300 किलोमीटर दूर रहने लगीं और सिर्फ शादी समारोह या किसी अन्य समारोह में ही मिला करती थीं. कोइमे के परिवारवाले बताते हैं कि वो और उनकी बहन जब बूढ़ी होने लगीं तो वे हमेशा ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने का सपना देखती थीं मगर तब उन्होंने अंदाजा नहीं था कि उनका नाम दर्ज हो जाएगा. अब कोइमे की याददाशत कमजोर हो गई है इसलिए वो वर्ल्ड रिकॉर्ड के मायने नहीं समझ पा रही हैं. दोनों ही अब वृद्धाश्रम में रहती हैं और इस पुरस्कार से उनके परिवारवाले बहुत खुश हैं.

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