जेल में जाने पर अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा लें, समय का सदुपयोग करें।

ललित होंडा बौद्धिक भारत भीनमाल

भीनमाल- सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कानूनी जागरूकता शिविर बंदियों को दी निःशुल्क कानूनी सेवा के तहत अधिवक्ता नियुक्त किए जाने की जानकारी। तालुका विधिक सेवा समिति की ओर से निर्देशानुसार सब -जेल में सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट साधना सिंह द्वारा जेल विजिट सहित जागरूकता शिविर का आयोजन हुआ। जेल विजिट के दौरान कारागृह प्रभारी मेहबूब अली ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को कारागृह में उपलब्ध सुविधाओं के बारे जानकारी दी।
जागरूकता शिविर में कैदियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट सिंह ने बताया कि भारतीय संस्कृति की दृष्टि से जेल में बंदियों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जाता है। इससे दीगर कई अन्य देशों में जुर्म करने पर जैसा जुर्म उसके अनुसार सजा जैसे सिर अलग कर देना, हाथ काट देना, कोड़े मारना आदि आदि सजाएं दी जाती है। अपने यहां व्यक्ति के कानून को तोड़ने पर, गंभीर जुर्म करने पर भी जेलों में स्वयं को सुधारने की व्यवस्था है। कई कैदी कभी झूठे आरोपों में जेल चले जाते हैं। कई लोग आदतन अपराधी होते हैं जो लंबे समय तक जेल में रहते हैं। सिविल जज ने कहा कि जेल में अच्छी पुस्तकें उपलब्ध रहती है उन्हें पढ़ें। हो सकता है आप अच्छी बातों की प्रेरणा से पुनः जब समाज के बीच जाएं तो आपका बदला व्यवहार समाज को अच्छा लगे। नहीं तो जेल में समाज के लिए नहीं स्वयं के लिए अच्छा बनने की कोशिश करें। जेल में समय का सदुपयोग करें जिससे आपको वापस जेल में आने को मजबूर नहीं पड़े। सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बताया कि निःशुल्क कानूनी सेवा कार्यक्रम के तहत कैदी न्यायालयों में अपना पक्ष रखने के लिए अधिवक्ताओं की नियमानुसार सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार रखते हैं एवं न्यायालयों से जमानत हो जाने पर संबंधित न्यायालय से सीधे ही कारागृह में जमानत आदेश की प्रति उचित माध्यम से कैदी को उपलब्ध कराई जाती है। सूचना पर बंदी अपने सगे-संबंधियों को सूचना देकर कानूनी प्रक्रिया के तहत जेल से रिहा हो सकते हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने किसी बंदी के अधिवक्ता नहीं होने के संबंध में भी कैदियों से जानकारी ली एवं एक बंदी बाद जमानत जेल में होना पाया गया। इस दौरान जेल में कुल 53 कैदी होने पाये गये। जेल विजिट के दौरान ड्यूटी पर तैनात सभी स्टाफ मौजूद मिले।

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