जिला कांग्रेस कमेटी झाबुआ ने राज्यपाल के नाम विभिन्न मांगो को लेकर सौपा विज्ञापन।

रामलाल सोलंकी बौद्धिक भारत समाचार

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी कि झाबुआ जिला के पदाधिकारियो ने विभिन्न मांगो को लेकर राज्यपाल को आवेदन देकर बताया कि वर्तमान में केन्द्र एवं राज्य में भाजपा सरकार के कार्यकाल में सम्पूर्ण प्रदेश सहित झाबुआ जिले के ग्रामीण एवं आम जनता परेशान है। वर्तमान में म.प्र. मंहगाई, बेरोजगारी, सरकारी कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन,पेयजल,बिजली,खाद्यान्य, जैसी अनेक समस्याओं से ग्रस्त है। मंहगाई देश सहित म.प्र. में तेजी से बढ रही है,जिससे आमजन का जीना दुश्वार हो गया है जैसा कि सर्वविदित है कि गैस टंकी जो पूर्व कंाग्रेस सरकार में 600 रूपये में आती थी वह आज 1150 / में आ रही है, इसी प्रकार पेट्रोल डीजल के भावों में भी भारी बढोतरी हुई इससे टांस्पोर्ट का कार्य महंगा हो गया जिससे सभी वस्तुओं के भावों में बढोतरी हुई है । आम जनता जिसे दूध जैसी बहुउपयोगी वस्तु को खरिदने में परेशानी आ रही ह जों दुध पूर्व में 30/-रू. पति लीटर था वह आज 62-65 रू. प्रति लीटर मिल रहा है। बेरोजगारी से झाबुआ जिला सहित पूरा प्रदेश परेशान है भाजपा शासन में संविदा शिक्षकों की पात्रता परिक्षा तो 2018 में ले ली गयी थी किन्तु आज दिनांक तक युवाओं को नोकरी नहीं दी गयी है कई छात्र ओवर ऐज हो गये है । इसी प्रकार पुलिसकर्मी, एवं अन्य विभागों में नियुक्ति नहीं हुई है बेरोजगार छात्र छात्राएं परेशान है पढाई कर ली लेकिन रोजगार नहीं है , शासन द्वारा हर समय परिक्षा के नाम पर बेरोजगारों से नोकरी के नाम पर फार्म भरवाये जाते है तथा लाखों करोडो रूपया इक्ठठा कर लिया जाता है लेकिन नोकरी नहीं दी जाती है। जब चुनाव का समय आता है तो हजारों की संख्या में नोकरी का झुठा वादा किया जाता है । विद्यार्थीयों के साथ सरकार भारी भेदभाव किया जा रहा है विद्यार्थीयों को स्कुल में छात्रवृत्ति नहीं मिल पा रही है छात्रावासों में भारी अनियमिता की जा रही है,अधीक्षकों की नियुक्ति में मनमानी की जा रही है वह सरकार के दबाव में उचित तरह से कार्य नहीं कर पा रहे है। शासकीय सेवक सरकार से परेशान है नई भरती नहीं होने से एक कर्मचारी को अनेक शाखाओं का कार्य करना पड रहा है जिससे वह मानसिक परेशानी झेल रहे है, कर्मचारीयों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, आंगनवाडी कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता, सभी विभागों के संविदा कर्मचारी परेशान है । संविदा कर्मचारीयों को नियमित नहीं किया जा रहा है वे अपनी मांग रख कर परेशान हो कर हडताल आदि कर रहे है जिससे प्रदेश की स्थिति खराब हो रही है। कर्मचारीयों को महंगाई भत्ता एवं अन्य सुविधा नही प्रदान की जा रही है। पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्हे अधिकार से वंचित किया जा रहा है। म.प्र. में पंचायत चुनाव होने के छः माह से अधिक समय हो गया किन्तु आज तक पंचायतों को सरकार राशि उपलब्ध कराने में अक्षम साबित हुई है। पंचायत प्रतिनिधि अपने कर्तव्यों को पालन नहीं कर पा रहा है, रोजगार गांरटी योजना अन्तर्गत पंचायतों को नवीन कार्यो की स्वीकृति नहीं मिल पा रही है जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की समस्या उत्पन्न हो गयी है, जो कार्य पूर्व में हो गये है उनकी राशि का मजदुरों को भुगतान नहीं हो रहा है। इससे काफी मात्रा में पलायन हो रहा है। मनरेगा योजना जो कि कांग्रेस सरकार ने प्रारंभ की थी उस योजना को पूर्ण रूप से प्रारंभ किया जावे। ग्रामीणजन को अपनी मेहनत की किमत नहीं मिल रही है। कपिल धारा कूप, सुदूर सडक योजना, प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक योजना ,बीआरजीएफ जैसी अनेक योजना इस सरकार ने बन्द कर दी है। प्रधानमंत्री आवास योजना में भारी गडबडी हो रही है ग्रामीण एवं शहरी हितग्राहीयों में राशि को लेकर भेदभाव किया जा रहा है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र का विकास रूक सा गया है। पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय में भी काफी असमानता है वर्तमान में सरपंचों का मानदेय बढा दिया गया किन्तु पंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्यों के मानदेय की ओर सरकार का ध्यान नहीं है। इस सबंध में सरकार तत्काल ध्यान देवे। तथा पंचायत को तत्काल राशि उपलब्ध कराया जावे एवं पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानजनक मानदेय प्रदान किया जावे। पैसा एक्ट को पूर्ण रूप से प्रदेश में लागू नहीं किया गया है उसे तोड मरोडकर पेश किया जा रहा है, इसके कारण पंचायत के सरपंचों के अधिकार को समाप्त किया जा रहा है, तडवीयों के अधिकार भी खत्म किया जा रहा है। पेयजल की भारी समस्या जिले में है, पेयजल हेतु झाबुआ जिले में जल जीवन मिशन अन्तर्गत नल जल योजनान्तर्गत जिसके लिए 600करोड रूपये खर्च किया गया जिसके अन्तर्गत ग्रामीणों क्षेत्रों में टंकीया,कूप, पाईपलाईन सुदुर गांवों में गया । उसमें भारी भ्रष्टाचार किया जा रहा है एवं घटिया निर्माण किया जा रहा है तथा टंकीयों का निर्माण किया गया किन्तु टंकीयों को भरने की कोई व्यवस्था नही है,जल जीवन मिश्न योजना पूरी तरह से फैल हो गयी है तथा सरकारी राशि का दुरूप्योग हो रहा है। जिले में हेण्डपंप खनन नहीं किये जा रहे है जहां किये जा रहे वह मनमानी से किया जा रहा है। उक्त कार्यो की एक अलग से समिति बनाकर जांच कर भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए । खाघान्न वितरण योजना में काफी भ्रष्टाचार है आम जनता एवं गरीबों को शासकीय राशन उचित मूल्यों की दुकानों पर प्राप्त नहीं हो रहा है ग्रामीण जनता घंटों उचित मूल्यों की दुकान पर खडी रहती है लेकिन उन्हे खाली हाथ लोटा दिया जाता है तथा बाद में वही राशन कालाबाजारी की जाती है। उचित मूल्य की दुकानों पर खाद भी प्राप्त नहीं हो रहा है खाद के लिए किसानों को भटकना पड रहा है मंहगी दर पर किसानों को बाजार से खाद खरिदना पड रहा है। करोना काल के अन्तर्गत मध्यान्ह भोजन योजना में घर घर अनाज पैकेट के माध्यम से दिया जाना था उसका वितरण नहीं किया गया।

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