रामलाल सोलंकी बौद्धिक भारत समाचार
झाबुआ मै श्रीमती संतोष बारिया ग्र्राम लखपुरा विकासखण्ड रामा, जिला झाबुआ की रहने वाली हॅू, मै दिव्यांग महिला हूॅ मेरे पति का नाम करतार बारिया है समूह से जुडने के पूर्व मेरी स्थिति खराब थी। दिव्यांग होने के कारण मुझे कृषि कार्य करने में बहुत परेशानी होती थी और दो बच्चे है जिनको में अच्छे से पढा नही पा रही थी। जिससे मेरी आर्थिक स्थिति बहुत प्रभावित हो रही थी व परिवार का सही संचालन नही कर पा रही थी। इसके पश्चात 2013 में समूह में जुडने के बाद समूह से ऋण लेकर कृषि कार्य में लगाया फिर भी समूह की मासिक किस्त चुकाने में मुझे परेशानी आती थी। फिर समूह के माध्यम से आर सेटी झाबुआ में रेग्जीन बेंग एवं लेडिस सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके पश्चात् मैने समूह एवं सी.सी.एल. से 35 हजार रूपये का लोन प्राप्त किया एवं पारा क्षेत्र में सिलाई की दुकान खेाली जिससे मेरी मासिक आय 7 हजार से 8 हजार के लगभग होती है इसके बाद मेरे पति ने आर्थिक कल्याण से 50 हजार रूपये का ऋण लेकर पान की दुकान डलवाई जिससे उनकी मासिक आय 7500 से 9 हजार रूपये की लगभग होती है इस प्रकार हम दोनो की मासिक आय मिलाकर लगभग 17 हजार से 19 हजार होती है जिससे मेरे परिवार का भरण पोषण एवं मेरे बच्चो की पढ़ाई सही तरीके से करवा पा ही हूॅ मै ग्रामीण आजीविका मिशन का बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूॅ क्योकि आजीविका मिशन के कारण ही मेरे जीवन में बहुत बदलाव आया है।