“सूखा प्रभावित घोषित हो बड़वानी जिला” और विशेष राहत पैकेज की मांग को लेकर हजारों आदिवासियों ने कलेक्टर कार्यालय में दिया धरना।
सरकार से पूछा उद्योगपतियों और कंपनियों के कर्ज माफ तो किसानों के क्यों नही ??
भीम प्रकाश बोद्ध बौद्धिक भारत बड़वानी
बडवानी -आज दिनांक 11.09.2023 को बड़वानी में जागृत आदिवासी दलित संगठन के नेतृत्व में हजारों आदिवासी महिला पुरुषों ने फसल नष्ट होने और मुआवजे की मांग को लेकर रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। रैली इंद्रजीत हॉस्टल से शुरू होकर अंजड नाका होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची। इस वर्ष पूरे मध्यप्रदेश में वर्षा कम होने से किसानों की फसल सूख गई हैं और वह लगातार नुकसान झेल रहे हैं। सभी आदिवासियों ने एक स्वर में कहां कि इतनी भयावह स्थिति बनने के बाद भी सरकार की तरफ से राहत देने की कोई पहल नही की गई और ना ही सरकार की ओर से किसी तरह के मुआवजे की घोषणा की गई। इसीलिए आज हमें यहां आना पड़ रहा हैं। सरकार उद्योगपतियों के हजारों करोड़ों रुपयों के कर्ज आसानी से माफ कर देती हैं तो हम किसानों को इस संकट की घड़ी में कर्ज माफी क्यों नही ?कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरना दे रही महिलाओं ने अपनी सूखी हुई फसलों के नमूने सरकार और प्रशासन को दिखाए । कलेक्टर और प्रशासन ने उनकी परेशानी को सुनने और समझने की बजाए कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार को ही बंद कर दिया। इससे आदिवासी किसानों में रोष उत्पन्न हुआ। आदिवासी महिला पुरुषों को गेट पर ही रोकने की कोशिश की गई लेकिन लोग नही माने। और कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर जाकर धरना दिया।कलेक्टर कार्यालय के बाहर अपने वाजिब और कानूनी हक अधिकारों के लिए धरना दे रहे आदिवासियों को प्रशासन द्वारा पानी तक नहीं उपलब्ध करवाया गया। हरसिंग भाई ने कहा कि सरकार को हमारे भूखे परिवारों को कैसे नही देख पाती हैं? हमारी फसलों के दाम क्यों नही बढ़ते हैं? स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को क्यों नही लागू किया जा रहा हैं? हमारे लोग आज भी गुजरात और महाराष्ट्र में बंधुआ मजदूरी करने को मजबूर है उन्हें नियमानुसार किसी भी सामाजिक सुरक्षा का लाभ आज तक नही मिल पाया । जबकि प्रवासी मजदूर कानून में लिखा है कि पलायन पर जा रहे हर मजदूर और उसको ले जाने वाले ठेकदारों का पंजीयन होना चाहिए। जिसका पालन आज तक श्रम विभाग और कलेक्टर साहब ने नही किया है।
जिले के ज्यादातर आदिवासी परिवार सीमांत किसान है। जिनके पास सिंचाई के साधन नहीं है ,वर्षा का जल ही एकमात्र सिंचाई का स्त्रोत हैं। अधिकांश आदिवासी किसान पूरे वर्ष में एक ही फसल ले पाते हैं और यही फसल एक वर्ष के लिए उनके परिवार के भोजन का एकमात्र स्रोत होती हैं। इस वर्ष बारिश की कमी से उनके भोजन के साधनों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे है। जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई हैं। आदिवासियों ने कहां कि बीमा के नाम पर हमसे हजारों करोड़ रुपए सरकार और निजी कंपनियों ने लूटे है इसलिए इस मुसीबत की घड़ी में हम आदिवासी किसानों को बीमा राशि का तुरंत वितरण किया जाए। आदिवासी किसानों ने कहा कि इस सूखे की घड़ी में सरकार ने बिजली वितरण को क्यों कम किया है? 24 घंटे बिजली के बजाए केवल 7 घंटा ही बिजली हम किसानों को मिल रही हैं। जब उद्योगों और कंपनियों को बिजली की पर्याप्त आपूर्ति हो रही हैं तो देश के किसान को क्यों नहीं?रोजगार गारंटी में 100 दिन काम मिलने की सीमा को 240 दिन तक बढ़ाने की मांग के साथ दैनिक मजदूरी दर 221 से 600 रुपए करने की मांग की गई। मनरेगा को खत्म करने के लिए अपनाए जा रहे तरह तरह के हथकंडों जैसे ऑनलाइन हाजरी और बजट कटौती के प्रावधानों का जोरदार विरोध किया गया। नासरी बाई ने कहा – वन अधिकार कानून लागू होने के 16 साल बाद भी आज बड़वानी में 16000 दावों में से केवल 3352 दावों का निराकरण हुआ है।लाखों आदिवासी आज भी अपने वनाधिकार से वंचित हैं।
धरने के दौरान वालसिंग भाई ने बुरहानपुर जिले में संगठन कार्यकर्ताओं पर हो रहे हमलों का भी जिक्र किया । अभी हाल ही में संगठन कार्यकर्ता नितिन भाई को एक झूठे और बेतुके मामले में बुरहानपुर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। और आज 10 दिन से अधिक समय बीतने के बाद भी उनकी रिहाई नही हुई है। तो हम पूछते है हम आदिवासियों की सरकार कहां हैं? हमारे लिए न्याय कहां हैं? बड़वानी जिले के हजारों आदिवासी महिला पुरुषों ने नितिन भाई की तुरंत रिहाई की मांग की और बड़वानी प्रशासन के माध्यम से बुरहानपुर प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर संगठन पर हो रहे हमलों को नही रोका गया तो पूरे निमाड़ के आदिवासी इसका जवाब देंगे।अंत में मुख्यमंत्री और बड़वानी कलेक्टर के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया।