आदिवासियों के मसीहा आनंद निगवाल जनप्रतिनिधियो के लिए बने मिसालदिखाया आईना।

रामलाल सोलंकी बौद्धिक भारत समाचार खजुरी/राजपुर

जी हां हम ऐसे शख्सियत के बारे में बात कर रहे हैं जो एक छोटे से गांव में रहते हैं और काम बड़े-बड़े करते हैं उन्होंने आज ऐसा काम किया है जो जनप्रतिनिधियों को विधायक, सांसद, एमपी, एमएलए को आईना दिखाने वाला है जी हां हम बात कर रहे हैं आनंद निगवाल की जो एक छोटे से गांव बड़वानी जिले की राजपुर विधानसभा क्षेत्र के खजूरी गांव के निवासी है ओर खजूरी जोकि सिंगाजी महाराज की नगरी है और यहां पर प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं यहां पर मेला लगता है ऐसे गांव का विकास का जिम्मा आनंद निगवाल ने अपने कंधो पर लेकर सभी जनप्रति निधियो को आईना दिख दिया है, कि एक जनप्रतिनि्धि को किस प्रकार से कार्य करना चाहिए। यह एक ऐसा गांव है जिसे पूर्व में लोकसभा सांसद ने गोद लिया था और वह एक आदर्श गांव भी रह चुका है लेकिन हकीकत यह है कि वहां पर सही ढंग से अभी तक ना तो नालियों का निर्माण हो पाया है ओर ना ही प्रसिद्ध सिंगाजी महाराज मंदिर का उस हिसाब से विकास हो पाया है और ना ही आदिवासियों के लिए किसी प्रकार का कोई मांगलिक भवन है क्योंकि खजूरी पूर्ण रूप से आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है जहां पर आदिवासी लोग निवास करते हैं लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है की सांसद आदर्श ग्राम होने के बावजूद वहां पर किसी भी जनप्रतिनिधि ने कभी उस उस गांव के आदिवासी भाइयों के बारे में नहीं सोचा कि इतना बड़ा गांव होने के बावजूद यहां के भाई बहन ,माताएं ,बहने किस प्रकार से मांगलिक कार्य या किसी अन्य तरह के कार्यक्रम करते होंगे। सड़कों के किनारे, नालियों के किनारे बैठकर भोजन करने को विवश हैं क्योंकि उनके पास समाज के नाम पर या धर्मशाला के नाम पर कोई मांगलिक भवन नहीं है । इस विधानसभा क्षेत्र मे विधायक, सांसद दोनो आदिवासी होने के बावजूद यह लोग अपने समाज कि पीड़ा को नहीं समझ पाये ।जिसे आनंद निगवाल ने समझा, तथा वह काम कर दिखाया ,जो काम इन जन प्रतिनिधियों को करना था। लेकिन वो नहीं कर पाए । जो काम उस विधानसभा क्षेत्र के विधायक और लोकसभा सांसद नहीं कर पाए उसी कार्य का जिम्मा छोटे से गांव के से सरल सहज स्वभाव के धनी एवं लोगों के प्रिय चहते आनंद निगवाल ने उठाया । ओर उन्होंने अपने निजी स्वयं कि मेहनत अपने पास से एवं अपनी स्वेच्छा से गांव के लोगों को परेशान होता देख ₹500000 का नगद दान गांव के मांगलिक भवन के निर्माण के लिए तत्काल किया। यही नहीं वह गाँव के समाज के विकास के लिए वह पिछले १०-१२ सालो से छोटे बड़े कार्यक्रम करवाते आ रहे हैं ,जैसे गाँव मे रोड़ का निमार्ण या मरम्मत करना, प्रतिवर्ष युवाओं को खेल सामग्री व किट/ टी सर्ट १००-१०० बाटना, १००-१०० स्कुली बच्चों को किताबे व ड्रेसे बाटना, बुजुर्गों को पगड़ी व कपड़े बाटना और अगर किसी को पैसो कि जरुरत हो तो वह भी करते हैं । आगे भी हर तरीके से किसी भी तरह के सहयोग के लिए गांव वालों से अपील की है कि वह कभी भी किसी भी सहयोग के लिए कभी भी आ सकते हैं आनंद को समाज सेवा कि प्रेरणा उनके मार्गदर्शक आदर्श काका श्री पुर्व जनपद प्रतिनिधि ग्यासीराम निगवाल से मिली और उन्होंने एक और संकल्प लिया है कि गांव में किसी भी परिवार में अगर कोई व्यक्ति की मौत हो जाती है तो उसका पहले दिन का खर्चा स्वयं उठाएंगे । यह प्रेरणा उनको उनकी माताजी से मिली है क्योंकि कोरोना काल में उनकी माताजी का देहांत हुआ था और वह उस समय जो नहीं कर पाए थे वह अब संकल्प के रूप में पूरे गांव के परिवार के लोगों के लिए वह करना चाहते हैं इस प्रकार से आनंद निगवाल ने समाज के लोगों, सरपंच, जनपद, जिला प्रतिनिधि ,विधायक ,सांसद और सभी जनप्रतिनिधियों को इस प्रकार का कार्य करके एक तरह से उन्हें आईना दिखाया है कि एक जनप्रतिनिधि को किस प्रकार से समाज के लिए कार्य करना चाहिए और आनंद निगवाल का एकमात्र लक्ष्य केवल और केवल समाज का विकास करना ,उत्थान करना ही है चाहे वह किसी भी गांव या ब्लॉक या जिले का हो। वह समाज के लिए हमेशा मदद के लिए तत्पर रहते हैं चाहे उन्हें कभी भी किसी भी समय याद किया जाए। अगर ऐसी शख्सियत हर गाँव, हर विधानसभा ओर हर लोकसभा मे हो जाए तो एक गांव , जिला ही नहीं बल्कि पूरे देश प्रदेश का सर्वांगीण विकास बड़ी आसानी से किया जा सकता है । इस तरह की प्रेरणा हमें आनंद निगवाल ने देकर एक आदर्श मिसाल पेश कि है। गांव वालों ने आनंद निगवाल के इस पुनित कार्य के लिए बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया है और वे चाहते हैं कि हमारा विधायक, सांसद भी आनंद निगवाल जैसा ही हो ओर उन्हीं की तरह कार्य करें।

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