सरपंच से लेकर सांसद मंत्री तक बने ,लेकिन अपनी ही समाज का भला नहीं कर पाए जनप्रतिनिधि आखिर क्यों? – लेखक संजय सोलंकी

बाबूलाल सिसोदिया बौद्धिक भारत आष्टा

आष्टा – बहुत दिनों से सोच रहा था कुछ लिखूं मगर किसी कारणवश नहीं लिख पाया मगर आज समय निकालकर एक बात लिखने बैठ गया मगर जो लिखना चाह रहा था वह इतना आसान भी नहीं था फिर सोचा अगर हमारी कलम बंद रही तो कौन लिखेगा कौन है जो समाज के लिए आवाज उठाएगा अपनी समाज के लिए, अपने समुदाय के लिए, अपने उन समाज के लोगों के लिए जो कहते हैं हमारे समाज का सरपंच है हमारे समाज का विधायक है हमारे समाज का सांसद है हमारे समाज का मंत्री है फिर भी आज तक उन लोगों का भला नहीं हो पाया इसीलिए लिखने की कोशिश की है मुझे पूर्ण भरोसा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप मेरी लिखी हुई बात पर गौर करेंगे, बात यह है कि आष्टा विधानसभा देवास लोकसभा सोनकच्छ विधानसभा सीट आगर मालवा विधानसभा सीट तराना विधानसभा सीट और भी कई ऐसी सीट है जो अनुसूचित जाति एस सी वर्ग के लिए आरक्षित है यानी इन सीटों पर सिर्फ अनुसूचित जाति के लोग ही चुनाव लड़ सकते हैं और प्रतिनिधि चुनकर विधानसभा लोकसभा के मेंबर बनते हैं ताकि अपनी समाज अपने लोगों की बात और अपने समुदाय की समस्या को विधानसभा और लोकसभा में रख सके ताकि उन लोगों का भला हो उन लोगों की समस्या खत्म हो जो सैकड़ो सालों से किसी न किसी तरह से बिछड़ते और प्रताड़ित होते रहे हैं बात करते हैं देवास शाजापुर लोकसभा सीट की जहां पर शाजापुर पूर्व लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में विधानसभा क्षेत्र शुजालपुर (166) गुलाना (167)शाजापुर(168) आगर (169) सुसनेर (170) देवास (186)सोनकच्छ (187)हाटपीपल्या(188) सेट शामिल थी जिसमें आगर मालवा और सोनकच्छ विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी जिसमें 1977 में फूलचंद वर्मा सांसद बने इसके बाद 1984 में बापू लाल मालवीय सांसद बनकर लोकसभा में गए इसके बाद फिर 1989 और 1991 में एक बार फिर फूलचंद वर्मा ने जीत हासिल की फिर आए थावर चंद गहलोत जी जो की एससी वर्ग के भलाई समाज से आते हैं जो 2004तक शाजापुर पर जीते और मंत्री तक बनाए गए इसके बाद 2008 में शाजापुर लोकसभा सीट को समाप्त कर दिया गया 2009 को इस सीट को बदलकर देवास शाजापुर लोकसभा सीट कर दिया फिर दौर आता है कांग्रेस का 2009 तक सांसद रहे थावरचंद गहलोत को हराने के लिए कांग्रेस ने पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा को उतारा और एक कारनामा करने में कांग्रेस सफल भी रही लेकिन अभी तक उसे समाज का दर्द बांटने के लिए कोई भी नेता और प्रतिनिधि आवाज नहीं उठा सका जिस समाज के वोट लेकर दूसरे लोगों की चमचागिरी करने से फुर्सत नहीं मिली समाज का हमदर्द समाज की समस्या किसी ने नहीं सुनी और समाज का हमदर्द कोई भी नहीं बन सका समाज के युवाओं और न किसानों को आगे बढ़ा पाया फिर चुनाव आता है 2014 जिसमें मोदी नाम की ऐसी लहर चली के कांग्रेस के पत्ते रेत के ढेर की तरह बिखर गए और फिर देवास शाजापुर लोकसभा सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार सज्जन सिंह वर्मा को हराकर भारतीय जनता पार्टी के मनोहर ऊंटवाल सांसद चुनकर आए जो 2019 तक संसद बनाकर तो रहे मगर समाज की समस्या का हल नहीं निकाल पाए और एससी वर्ग फिर हताश हो गया एक बार फिर चुनाव आता है 2019 और मोदी जी की आंधी फिर चली और पूर्ण बहुमत से दिल्ली की गद्दी पर मोदी जी बैठे और देवास लोकसभा की गद्दी पर बैठे पूर्व न्यायाधीश और वर्तमान के सांसद श्री महेंद्र सिंह सोलंकी उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार मालवा के न्यायाधीश और वर्तमान के सांसद श्री महेंद्र सिंह सोलंकी उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार मालवा के प्रसिद्ध कबीर भजन गायक प्रहलाद सिंह टिपानिया को हराकर जीत हासिल की मगर वह भीसमाज के लिए खोटे सिक्के साबित हुए अब चुनाव आता है 2024 का भाई साहब को फिर टिकट दिया जाता है और जीत जाते हैं और कांग्रेस के उम्मीदवार राजेंद्र राधाकिशन मालवीय को हराकर फिर जीत हासिल की मगर अभी तक समाज उनकी तरफआस लगाकर देख रहा है कि कोई हमारे वर्ग हमारे समाज हमारे युवा जो आज नौकरी के लिए डर-डर की ठोकरे खा रहे हैं मगर कुंभकरण की नींद सोए सांसद महोदय अभी तक अपने समाज के लिए आगे नहीं आए,,, आष्टा विधानसभा का क्या है जातीय गणित? यहां कुल 2,48 , 274 मतदाता है लगभग इनमें से करीब 1 लाख के लगभग जनसंख्या अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के वोटरों की है जिसमें से लगभग 60000 वोटर अकेले बलाई समाज के हैं इन सबके बावजूद में भी रिजर्व सीट पर बलाई समाज का वर्चस्व रहा है इसी वर्ग से लोग अधिकतर विधायक बनते आए हैं,कुल12 विधायक में से 8 इसी बलाई समाज से रहे हैं पहली बार 1993 में बलाई समाज के रणजीत सिंह गुणवान विधायक चुनकर आए और 2003 तक विधायक रहे फिर 2003 में रणजीत सिंह गुणवान का टिकट काटकर रघुनाथ सिंह मालवीय को टिकट दिया और जीत कर आए 2008 से 2018 तक लगातार रणजीत सिंह गुणवान को विधायक बनाया गया फिर भी समाज का भला नहीं कर पाए फिर समाज के हाथ निराशा लगी और समाज के बेरोजगार युवा हताश हो गए 2018 में पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह मालवीय को समाज ने चुना और विधायक बने मगर मालवा में एक कहावत है भरोसे की भैंस ??? और समाज का विकास जीरो रहा फिर आता है चुनाव 2023 का और विधायक रघुनाथ सिंह मालवीय का टिकट काटकर जिला पंचायत अध्यक्ष गोपाल सिंह इंजीनियर साहब को दिया गया और गोपाल सिंह इंजीनियर जीत गए मगर अभी तक गोपाल सिंह इंजीनियर ने ऐसा कोई भी उल्लेखनीय कार्य समाज के प्रति नहीं किया जिससे कहा जाए भविष्य में कोई अच्छा काम गोपाल सिंह इंजीनियर कर पाएंगे समाज की हालत बहुत खराब है मगर जिस समाज के बीच से निकाल कर गए नेता और प्रतिनिधि ने आज तक कुछ समाज का हाल-चाल नहीं जाना आखिर क्यों इन लोगों को हमारे समाज के लिए कार्य करना ना पसंद लगता है आखिर क्यों ??समाज के युवा बेरोजगार है नौकरी के लिए कोई भी ऐसा कारखाना नहीं ऐसी कोई फैक्ट्री नहीं ऐसा कोई कार्य नहीं जिसमें नेताओं और प्रतिनिधियों ने समाज के लिए किया है मान्यवर साहब काशीराम जी ने कहा कि दलित लीडर केवल अपनी निजी फायदे के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस जैसे दलों के साथ मिलकर राजनीति करते हैं लेकिन देश आजाद हुए, 75 साल से ज्यादा हो गए हैं मगर आज भी हमारे समाज जनप्रतिनिधि बिजी हैं – लेखक संजय सोलंकी

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