नर्मदा घाटी के तीनों राज्यों के हजारों विस्थापितों ने, देशभर का समर्थन पाकर, सरदार सरोवर का जलस्तर रोकने के लिए सत्याग्रह का संकल्प लिया

नर्मदा घाटी के उपरी क्षेत्र के बांध और चुटका परिणाम परमाणु योजना पर पुनर्विचार का ऐलान

भारत भर के लिए ‘नदी संरक्षण, नदी घाटी सुरक्षा एवं पुनर्जीवन’ विधेयक पेश करेंगे, संसद में

इस्लामुद्दीन मुल्तानी बौद्धिक भारत कुक्षी

नर्मदा घाटी के सरदार सरोवर से विस्थापित हजारों की संख्या में बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर जिले से तथा महाराष्ट्र से सैकड़ो की तादाद में और गुजरात के प्रतिनिधी भी एकत्रित आकर विशाल रैली से निकल पड़े! शहिद स्तंभ पर शहीदों को फूलहार और नमन करने में शामिल थे, पर्यावरणवादी उड़ीसा के प्रफुल्ल सामंतरा, बंगाल के प्रदीप चटर्जी, राजस्थान के निखिल डे, जलवायु विशेषज्ञ सौम्या दत्ता जी व अन्य तथा आंदोलनकारी विस्थापित भी बैलगाड़ी पर प्रमुख अतिथीयों को बिठाकर, हजारों की रैली पैदल चलकर बड़वानी शहरवासियों को ऐलान करते हुए, गूंजते हुए नारों के साथ नवलपुरा में यादव सभागृह पहुंची, जहां जनसभा का आयोजन हुआ| भादल (तह. जिला बडवानी) के आदिवासी बच्चों के नृत्य से ही रैली और सभा भी सजायी गयी, नर्मदा आंदोलन के 39 साल पूरे होने पर तथा द्वार पर खड़ा सरदार सरोवर का जलस्तर, संभावित डूब तथा नदी के प्रदूषित जल की चुनौतियों को उजागर करने का यह विशेष कार्यक्रम एक चेतावनी भरा रहा! दस राज्यों से आये तमाम अतिथीयों में पर्यावरणवादी नदियों की सुरक्षा पर कार्यरत रहे, नीति/ कानून निर्माण और सत्याग्रही संघर्ष के साथ कार्यरत वरिष्ठ कार्यकर्ता भी थे| आदिवासी किसान, मजदूर, मछुआरे, सभी समुदायों को न्याय दिलाने वालों की उपस्थिती से घाटी के जनजन नर्मदा और देश की नदियाँ, नदी घाटियाँ बचाने के लिए संकल्पित हो उठे।
सरदार सरोवर के डूबग्रस्तों की ओर से कैलाश यादव और कमला यादव ने स्वागत करने बाद श्यामा भारत मछुआरा, सुशीला नाथ, मुकेश भगोरिया, राहुल यादव, पहाड़ी पट्टी के नूरजी वसावे और शैलेश तडवी आदि ने यहां की चुनौतियां बयां की| 2023 में आयी डूब, बिना संपूर्ण पुनर्वास होते हुए अवैध है इसलिए नुकसान की राहत उर्वरितों को मिले और संपूर्ण नुकसान भरपाई सबको मिले, इस मांग के साथ, पुनर्वास पूरा होने तक जलस्तर रोकने की जरूरत और उसके लिए लडने का संकल्प घोषित किया| मछुआरों को जलाशय पर ठेकेदारी नहीं, प्रस्तावित सहकारी संघ का पंजीयन चाहिये तो 15946 ‘डूब के बाहर’ किये परिवारों को और अन्यों को उर्वरित पुनर्वास के लाभ चाहिये, यह आवाज उठायी| कुम्हार, केवट, उर्वरित दुकानदार और गुजरात या मध्य प्रदेश में अनुपजाउ अतिक्रमित जमीन आबंटन में फंसाए लोगों के हक की बात भी उठी! नावड़ाटोली, धरमपुरी, गाजीपुरा से लेकर धनोरा, जांगरवा, बिजासन तक तथा अलीराजपुर, बडवानी, धार के पहाड़ी गावों तक परिवार पुनर्वास बाकी होते हुए 40 वे साल में भी संघर्ष जारी रखेंगे, हक लेके रहेंगे, महाराष्ट्र से पधारे सैकड़ों आदिवासियों की ओर से नुरजी वसावे और लतिका राजपूत ने शासन की असंवेदना पर सवाल उठाया| जल, जंगल, जमीन पर आदिवासियों का हक, ‘पेसा’ कानून का पालन, देशभर नकारा जाता है, तभी विकास के नाम पर विनाश होता है, यह बताया| नर्मदा बचाओ आंदोलन के सरदार सरोवर में जो पाया है, उसके आगे भी संघर्ष होगा, और हम निर्माण का कार्य भी आगे बढ़ाएंगे- हमारी जीवन शालाओं से स्वास्थ्य, राशन, किसान को हर उपज का सही दाम, आदि मुद्दों पर भी आवाज उठाएंगे, नवनिर्माण के लिए यह कहा| चेतन साल्वे ने महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और गुजरात की, पुरी नर्मदा की संस्कृति और प्रकृति बचाने के लिए एकता और समता के, अहिंसक मार्ग पर चलेंगे यह भी जाहिर किया, राजस्थान से आये निखिल डे और शंकर भाई सूचना अधिकार, मनरेगा, स्वास्थ्य सेवा, गिग वर्कर्स, जवाबदेहिता आदि पर कानून निर्माण में, अरुणा रॉय जी के साथ, अहम भूमिका निभाने वाले रहे है| निखिल डे ने कहां की 39 साल तक संघर्ष से नर्मदा आंदोलन ने जो हासिल किया, वह शासन के साथ केवल संघर्ष से ही नहीं, संवाद से भी! शासन की संवेदनशीलता और जवाबदेहिता नहीं होती है तो समस्याओं का निराकरण नहीं होता है| नर्मदा आंदोलन जैसा 39 साल का अनुभव देखकर ‘शासन की जवाबदेहिता’ पर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कानून बेहद जरूरी है! मनरेगा जैसी योजना पर भी शासन बजट कम कर रही है तो रोजगार बढ़ाये बिना आदिवासी, किसान, मजदूर, मछुआरे, सभी की आजीविका छिनना, डुबाना बहुत बड़ा अन्याय है| इसीलिए किसान विरोधी, श्रम विरोधी कानूनों का विरोध तो हमने करना ही चाहिए लेकिन सही कानून, जैसे नदी बचाने के लिए, लाने के लिए भी जागृत और सक्रिय होना चाहिये।
शंकर भाई ने कठपुतलीयों को नचाते गीत द्वारा सबको आवाज उठाने की प्रेरणा दी-
प्राकृतिक विनाश के विरोध में संघर्षरत कैलाश मीणा जी ने नर्मदा आंदोलन की विचारधारा को महत्वपूर्ण बातकर राजस्थान में स्वयं पर तथा स्वतंत्रता सेनानीयों के परिवार पर होते रहे हमलों की हकीकत बतायी| हिम्मत से लड़कर प्रकृति बचाने का ऐलान किया, जाने-माने पर्यावरणवादी उड़ीसा के प्रफुल्ल सामंतरा जी ने आंदोलन को दीर्घ, जीवट संघर्ष के लिए बधाई देते हुए कहा कि वे नर्मदा घाटी ने हासिल किया हजारों का पुनर्वास देखते आये हैं लेकिन पिछले साल की डूब अवैध थी तो फिर से ऐसी बर्बादी न हो, इसके लिए चला उपवास- सत्याग्रह भी महत्वपूर्ण है| आदिवासी, किसान, मजदूर सभी ने पीढ़ियों से बचायी हर नदी- प्रदूषण और विनाश से, जो आज बर्बाद हो रही है| विकास की अवधारणा ही गलत होकर कॉर्पोरेटीकरण, निजीकरण ही उसका कारण है| इसे बदलने के लिए यहां के विधायकों ने भी आवाज उठाना जरूरी है| हम आने वाले दिनों में भी अगर जलस्तर बढ़ने देगी शासन और डूबायेगी, कई परिवारों के बिना पुनर्वास और आपको फिर से संघर्ष पर उतरकर उससे टक्कर लेनी पड़ी तो हम, देशभर के जनआंदोलनों के साथी आपकी साथ जरूर देंगे, सौम्या दत्ता, आंतरराष्ट्रीय जलवायु विशेषज्ञ के नाते सभी को यह कहकर चेताया कि सैकड़ो सालों से, जीने अधिकार हम मानते रहे लेकिन आज जब हम हर प्रकृति निर्भर समुदाय का हक छिना जा रहा है, तब हमें जानने होंगे इसके बुनियादी कारण! प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने से ही कार्बन की मात्रा बढ़ी है और जलवायु में परिवर्तन आने से वर्षाकाल में बाढ़ का सामना, बांधों का टूटना, पहाड़- भूमी का धंसना मौत का कारण बना है| भुगतने वाले तो मेहनतकश है, जिन्हें लड़ना पड़ता है, क्योंकि शासन जैसे सरदार सरोवर और नर्मदा घाटी के संदर्भ में भी, जलवायु परिवर्तन की स्थिति और बड़े बांधों के आघातों संबंधी संवेदनशील नहीं है| हमें एकजुटता से नर्मदा घाटी को हक दिलाना है और देश की सभी नदियाँ, प्रकृति भी बचानी है, इन्हीं मुद्दों को ग्रामीण कलाकार संजय भोसले जी ने चित्रित किये एक बैनर, द्वारा रेत खनन, औद्योगिक अवशिष्ट, STP के बिना शहर का मैला, और क्रूझ से प्रदूषण बताते हुए समर्थकों ने नर्मदा पर हो रहे आघात को रोककर उसे निर्मल बहने देने की मांग का समर्थन किया, प्रदीप चटर्जी, राष्ट्रीय नदी पर निर्भर मछुआरों के संगठन के संस्थापक और संयोजक बोले कि नर्मदा और हर नदी पर पेयजल का उपयोग करने वाले सभी नागरिकों का, वैसे ही मत्स्यसंपदा पर जीने वाले मछुआरों का हक भी है कि वे नदी की बर्बादी पर सवाल करें| उन्हें उजाड़ने पर देश की जनता भी पेयजल अशुद्ध और नदी अ-निर्मल होने से प्यास नहीं बुझा पायेगी| नर्मदा पर बने जलाशय में ठेकेदारों का मत्स्यव्यवसाय का हक नामंजूर करते हुए, उन्होंने कहा कि ऐसी लूट से बचे हुए नर्मदा घाटी मछुआरों ने भी बड़ी जीत आजतक ली है, गुजरात से आये विस्थापितों के प्रतिनिधि शैलेश भाई, वाघोडिया ने भी बांध के नीचेवास की हैरानी बतायी और कॉलोनी, कैनाल से उजड़े आदिवासी तथा भरुच, अंकलेश्वर जैसे शहरों के निवासी भी क्यों और कैसे उजाड़े गये, यह सवाल किया| प्रधानमंत्री जी का जन्मदिन मनाने के लिए सरदार सरोवर के गेट्स न खोलने से हुई बर्बादी| रामकृष्ण भाई, गोरा ने 1961 में उनसे 60 से 200 रु. एकड़ में छिनी गई खेती पर आजतक पुनर्वास न मिलने पर आक्रोश जताया और सभी को बताया, गुजरात में पहुंचने पर भी लाखों लिटर्स पानी, मुख्य और शाखा नहर के अंत में, कच्छ के रण में बहाया जा रहा है, छोटी नहरे नहीं बनाने से| कच्छ के किसानों को नहीं के बराबर सिंचाई और 400 से अधिक कंपनियों को सस्ते में पानी देकर की है उनकी भलाई, महाराष्ट्र में नदी के पुनर्जीवन के लिए रिव्हर फ्रंट के खिलाफ संघर्षरत संतोष ललवाणी जी ने नदियाँ जीवित इकाई होकर उन पर जो आक्रमण बड़े बांध या रिव्हर फ्रंट जैसी योजनाओं से हो रहा है, वह समाज और प्रकृति दोनों पर आघात कैसा करता है, यह बताते हुए नदियों को अविरल और निर्मल रखने, प्रकृति और नदी संरक्षण पर लद्दाख से नर्मदा तक की जनता का संघर्ष जरूरी बताया| संतोष लालवाणी जी ने लद्दाख के समर्थन में 10 दिन का उपवास पुणे में किया था| नर्मदा आंदोलन के 40 वे साल में होने वाले हर कार्य में साथ देने का आश्वासन दिया|
सभी अतिथि और नर्मदा घाटी के प्रतिनिधियों ने ‘नदी संरक्षण, नदी घाटी सुरक्षा एवं पुनर्जीवन, अधिनियम के मसौदे को जाहिर किया| पुरुषोत्तम शर्मा जी ने लोकसभा सांसद राजाराम सिंग जी और राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा जी के द्वारा विधेयक पेश करने का आश्वासन दिया! मीरा संघमित्रा ने जनआंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के ‘नदी घाटी मंच’ की तरफ से इस विधेयक को देशभर प्रसारित करके, सांसदों को भी जागृत और सक्रिय करने का वादा किया| इस विधेयक से नदियां बचाएंगे तो जल और जीवन बचेगा अन्यथा ‘जल’ ही युद्ध का और मौत का मुद्दा बनेगा, यह चेतावनी भी दी!
सांसदों के प्रतिनिधी तथा संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेता, उत्तराखंड के पुरुषोत्तम शर्मा जी ने अपने ऊर्जावान वक्तव्य में देश की परिस्थिति बयां करते हुए कहां की प्रकृति पर हो रहा अतिक्रमण आम जनता के जीवन पर आघात थोप रहा है| 39 साल के नर्मदा घाटी के आंदोलन के द्वारा, हजारों परिवारों का पुनर्वास पाया है विस्थापितों ने तो भी उर्वरित जन-जन को बचाना जरूरी है| हमें चिखल्दा- खेड़ा, टीनशेड, धरमपुरी, एकलबारा देखकर हैरान हुए| जब बड़ी पुनर्वसाहटों में हजारों मकान देखे तो आंदोलन की हासिली भी जानी| हम आगे फिर डूब से अन्याय ढोया जाएगा तो यहां के सत्याग्रही संघर्ष को संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा देशभर आवाज उठाएंगे| उन्होंने राजाराम सिंग जी जैसे सांसद तथा मनोज कुमार झा जी की तरफ से नदी सुरक्षा अधिनियम को संसद में दोनों मंचों पर विधेयक के रूप में प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया और कहां कि केंद्र तथा राज्य की सरकार को आज ही हम चेतावनी देते हैं कि देश की नदियां जंगल, पहाड़, कृषि भूमी बचाने का कार्य करें, विनाशकारी विकास न थोपे श्रमिक, गरीब, प्रकृति निर्भय समुदायों को महेंद्र यादव जी ने बड़े बांधों की समस्या को तटबंधो की समस्या से जोड़ते हुए बिहार में कोसी नदी पर नेपाल में बने बांधों के अलावा बिहार में बनाये गये तटबंधो के कारण फंसे रहे, बेहाल और वंचित रहे 10 लाख लोगों की दर्दनाक स्थिति बयां की! देशभर की नदियों की घाटियों को बचाने, प्रकृति सुरक्षा जो आजीविका से जुड़ी है, उसी के विनाश से बड़ी मात्रा में पलायन होता है, सबको एकजुटता से संघर्ष और नये कानून का ऐलान किया, म.प्र. के सागर जिले से पधारे संदीप ठाकूर जी ने शासन की नींद खुलना जरूरी बताया| किसानों को ऐलान किया कि सोयाबीन के लिए 8000 /- प्रति क्विंटल और हर उपज का सही दाम लेने लिए संघर्ष करे| जयपाल सिंह जी ने पार्वती नदी योजना से किसानों पर थोपे जा रहे विस्थापन के विरोध करते, नर्मदा आंदोलन को समर्थन और उनसे मध्यप्रदेश के सभी विस्थापितों को सहायता पाने का ऐलान जाहिर किया| इंदौर से पधारे किसानों की समस्या और समाधान पर कार्यरत रहे उमरिया से पधारे राधेश्याम काकोडिया ने गैरबराबरी का, किसान, मजदूर अन्नदाता होते हुए, उन पर तथा आदिवासियों पर हो रहा अवैध विस्थापन से अन्याय के खिलाफ संघर्ष में साथ देने का आश्वासन दिया, खुदाई खिदमतगार के किरपाल भाई ने जाति- धर्म के पार एकजूट होगे तो ही जीतेंगे, यह संदेश दिया, इंदौर से पधारे विनीत तिवारी, सारिका सिन्हा, प्रमोद बागड़ी, वरिष्ठ पत्रकार- लेखक हरमिंदर सिंग तथा अधिवक्ता अंजुम जी ने महिला शक्ति को तथा जीवट संघर्ष को बधाई देते हुए, आगे के दौर को समर्थन जाहिर किया|
महाराष्ट्र से पधारे पूना के जो अथियाली तथा चोपडा के प्रदीप पाटील जी और साथी, महू के सुंदरसिंग पटेल बडवानी के चंदू यादव और डॉ रशीद पटेल आदि ने समर्थन दिया, सेंचुरी मिल्स के फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के खिलाफ लड़ते आये श्रमिकों की ओर से मनीषा पाटील ने नर्मदा घाटी के और देशभर के श्रमिकों को साथ- सहयोग देने का वादा किया| उन्होंने कहा कि सत्याग्रह की राह पर चलते हुए कानूनी लड़त में सर्वोच्च अदालत तक जीत हुई है और औद्योगिक न्यायालय में न्याय मिलने की अपेक्षा है! जीवटता से संघर्ष करने से ही न्याय मिलता है, जनशक्ति जुटाकर ही शासन सच्चाई मानती है; नर्मदा आंदोलन से प्रेरित होकर हम इसी मार्ग पर चलेंगे| श्रमिक नवीन मिश्रा जी ने अपने गीतों से माहौल ऊर्जावान कर दिया, बड़वानी के विधायक राजन मंडलोई जी ने अपने वक्तव्य में नर्मदा आंदोलन के सालों से गवाह होने पर, आज तक पुनर्वास बहुत कुछ पाया है तो भी उर्वरित परिवारों के लिए चल रहे संघर्ष को जायज बताया| विधानसभा में सवाल उठाने पर तद्दन गलत जवाब कैसे दिये जाते हैं, यह सवाल खड़ा करते हुए शासन से मांग की कि तत्काल पुनर्वास का कार्य पूरा करें और जब तक वह नहीं होता, तब तक जलस्तर मर्यादित रखे| घाटी के सभी विधायक मिलकर हम भी ‘हक्कभंग’ का सवाल उठाएंगे, यह मांग भी पुरजोरता से रखी; जिससे सभी भाई बहन आश्वासित हुए, मेधा पाटकर जी ने समारोप करते हुए 39 साल के संघर्ष और निर्माण के बाद भी 40 वे साल, जीवटता से वंचितों, शोषितों के लिए विस्थापितों का संघर्ष क्यों जारी रहना है, यह उजागर किया| विकास की अवधारणा पर सवाल उठाने विस्थापितों का हक है, यह बताते हुए विकास विरोध का आरोप गलत है तो हमारा नजरिया सत्य है| ‘बिना पुनर्वास डूब नामंजूर है’ तो इस साल, सितंबर में भी सरदार सरोवर का जलस्तर बढने न देने का ऐलान और जलसत्याग्रह की चेतावनी दोहरायी! प्राकृतिक संसाधनों की लूट और विनाश की छूट, ही भ्रष्टाचार और अत्याचार दोनों हो रहा है, यह भी कहा| नर्मदा का जल शुद्ध नहीं, प्रदूषण से भरा है और शहरी गंदगी बिना STP से उपचार किये बगैर बहाना, औद्योगिक और खेती के अवशिष्ट पदार्थ, तथा अवैध रेत खनन से हो रहा है यह दोहराया| नर्मदा- सरदार सरोवर में ‘क्रूझ’ चलाकर और प्रदूषित करने से पेयजल बर्बाद होकर जनता को मृत्यू की कगार पर धकेला जाना नामंजूर घोषित किया, जनसभा में नंदुरबार से पधारे अनिल कुंवर जी, दादा भाई पिंगले, चुनीलाल भाई ने, तथा चेतन साल्वे, विजय वलवी ने मिलकर संघर्ष के, आवाहनात्मक गीतों का नजराना पेश किया, कानूनों का ही नहीं संविधान का भी उल्लंघन होता है, विधानसभा में विधायकों ने और संसद में सांसदों ने उठाये सवालों को भी झूठे जवाब दिया तो सत्य साबित होगा, सत्याग्रह से ही यह कहकर सभी ने जाहीर किया कि ‘कानूनी और मैदानी’ लड़त अहिंसा के मार्ग पर तीनों राज्यों के वंचितों की, बर्बादी की भुक्तभोगियों की एकजुटता के अलावा देशभर के समर्थकों की नदी घाटी की जनता की सहभागिता से आगे बढाएँगे| जाति- धर्म के पार हम न डरेंगे, न डराएंगे, आगे बढ़ते जाएंगे इस नारे के साथ समाप्त हुआ विशाल सम्मेलन जिसमे भगवान सेप्टा, देवीसिंह तोमर, मुकेश भगोरिया, राहुल यादव, कमला यादव, निर्मला भिलाला उपस्थित रहे।

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