नारायणलाल सैणचा बौद्धिक भारत बेंगलूरू
बेंगलूरू: सीरवी समाज ट्रस्ट की और से एच. एस. आर. लेआउट में चल रहे चातुर्मास में कथा का वाचन करते हुए स्वामी रामप्रकाश जी नें कहा सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा उन्होंने कहा 15 अगस्त 1947 के दिन भारत देश आजाद हुआ। उससे पहले हम अंग्रेजों के गुलाम थे। सदियों की गुलामी के पश्चात अंग्रेजों के बढ़ते अत्याचारों से त्रस्त भारतवासियों के मन में विद्रोह की ज्वाला उस समय भड़की, जब देश के अनेक वीरों ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर हमें आजादी दिलाई। इसीलिए 15 अगस्त का दिन देशवासियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।नेताजी सुभाषचंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और कई नेताओं ने आजादी की क्रांति की आग फैलाई और अपने प्राणों की आहुति दी। सरदार पटेल, गांधी जी, नेहरू जी आदि ने सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए बिना हथियारों की लड़ाई लड़ी। कई सत्याग्रह आंदोलन और लाठियां खाने और कई बार जेल जाने के पश्चात अंग्रेजों को भारत छोड़कर जाने पर मजबूर कर दिया। अंग्रेजों के अत्याचारों/ अमानवीय व्यवहारों के प्रति भारतीय जनता की एकजुटता बहुत काम आई और इस तरह 15 अगस्त 1947 का दिन हमारे लिए ‘स्वर्णिम दिन’ बन गया। हम, हमारा देश स्वतंत्र हो गए। अंग्रेजों के चुंगल से हमें मुक्ति मिल गई। स्वतंत्रता दिवस के इस ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए ही सन् 1947 से आज तक यह दिन हम बड़े ही उत्साह और प्रसन्नता के साथ मनाते आ रहे हैं। इस दिन हमारे प्रधानमंत्री राजधानी दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। बड़े ही धूमधाम और भव्यता के साथ यह दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर संस्था के सचिव लक्ष्मणराम आगलेचा, सहसचिव केनाराम मुलेवा, सहसचिव छेलाराम काग, कोषाध्यक्ष भंवरलाल बर्फा, सह-कोषाध्यक्ष बाबूलाल सोलंकी, नवयुवक मंडल के अध्यक्ष महेंद्र राठौड़ सचिव मदन राठौड़ एवं सम्मत कमिटी के सदस्य मौजूद थे।