रामलाल सोलंकी बौद्धिक भारत बड़वानी
बड़वानी 03 जून 2024/ पीएच.डी. की डिग्री के आधार पर मुख्य रूप से उच्च शिक्षा में सहायक प्राध्यापक, लायब्रेरियन, स्पोर्टस ऑफिसर आदि के रूप में कॅरियर बनाया जा सकता है। न्यूनतम दो वर्षों में और अधिकतम चार वर्षों में पीएच.डी. की जा सकती है। चार वर्ष बाद भी अवधि बढ़ाने के प्रावधान हैं। ये बातें शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी के स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित संवाद में एम. ए. इतिहास चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कॅरियर काउंसलर और पीएच.डी. शोध निदेशक डॉ. मधुसूदन चौबे ने कहीं। यह आयोजन प्राचार्य डॉ. दिनेश वर्मा के मार्गदर्शन में किया गया। संवाद का समन्वय करने वाले कार्यकर्तागण प्रीति गुलवानिया एवं वर्षा मुजाल्दे ने बताया कि स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों को पीएच.डी. करने और सहायक प्राध्यापक के रूप में चयनित होने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। ऐसे होती है पीएच.डी. – डॉ. मधुसूदन चौबे ने बताया कि सर्वप्रथम स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करना आवश्यक है। इसके उपरांत प्रवेश परीक्षा या नेट के जरिये एडमिशन, साक्षात्कार, कोर्स वर्क, कोर्सवर्क परीक्षा, आवेदनपत्र और सिनॉप्सिस जमा करना, आरडीसी से अनुषंसा, अनुसंधान कर शोध सारांष और शोध प्रबंध तैयार करना, प्री पीएच.डी. प्रजेंटेशन, मौखिक परीक्षा आदि स्टेप्स के जरिये पीएच.डी. की जाती है। हाल ही में यूजीसी ने पीएच.डी. कोर्स में प्रवेष की प्रक्रिया में बदलाव किया है। पहले इसके लिए डीइटी यानी डॉक्टरल इंटरेंस टेस्ट पास करना आवश्यक होता था। अब नेट एग्जाम के माध्यम से पीएच.डी. में एडमिशन मिलेगा। नया प्रावधान शीघ्र ही लागू हो जाएगा। लायब्रेरी साइंस में पीएच.डी. कर रही कार्यकर्ता प्रीति गुलवानिया ने बताया कि सरकारी और प्राइवेट विश्वविद्यालय से पीएच.डी. करने पर खर्च होने वाली राशि अलग-अलग होती है। प्रायवेट यूनिवर्सिटी की फीस अधिक होती है। वहां साढ़े तीन लाख रुपये तक खर्च हो सकते हैं। सरकारी विश्वविद्यालय से पीएच.डी. करने पर लगभग एक लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। विश्वविद्यालय, शोध केन्द्र, केन्द्रीय पुस्तकालय आदि की फीस, टाइपिंग, फोटोग्राफी, बाइंडिंग आदि पर राशि खर्च होती है।