छोटू चौहान बौद्धिक भारत खंडवा
49 साल पहले वर्ष 1975 में अतिप्राचिन हनुमान जी ने इसी तरह से चोला छोड़ा था
ओंकारेश्वर तीर्थनगरी में मुख्य मंदिर प्रवेश द्वार पर स्थित प्राचीन दक्षिण मुखी हनुमान जी की प्रतिमा ने मंगलवार रात्री मे चोला छोड दिया। पुजारी दीक्षित परिवार के पंडित अनुप दीक्षित ने बताया कि मंदिर में स्थापित भगवान हनुमान जी की प्रतिमा अतिप्राचीन है। इससे पूर्व 49 साल पहले वर्ष 1975 में हनुमान जी ने इसी तरह से चोला छोड़ा था।जोड गणपति मंदिर के महंत मंगलदास जी महाराज के मार्गदर्शन में पुजारी दीक्षित परिवार ने हनुमान जी द्वारा छोड़े गए चोले को नर्मदा के तट ले जाकर विधि-विधान पूर्वक नर्मदा में विसर्जित कर दिया गया। चोला छोडने के बाद अतिप्राचिन प्रतिमा की खास बात यह है कि इसमे ग्राम काटकुट के पास प्रसिद्ध ओखलेश्वर हनुमान जी कि प्रतिमा से मिलती जुलती आकृति ऊभरकर सामने आई हैं। ओखलेश्वर हनुमान का भी इतिहास है कि जब वहां के संत ने अपना शरीर छोड़ा तब उसे मूर्ति में से आंसुओं की धारा मूर्ति में से निकली कई लोगों ने उसका साक्षात्कार किया अखिलेश्वर में आज भी 24 घंटे रामायण पाठ चलता है वह स्थान काटकूट के पास में है।